रंगों के पर्व से जुड़ी प्रदेश में कई अनूठी परंपराएं हैं, लेकिन भीलवाड़ा में शीतला अष्टमी पर बुधवार को एक अद्भुत नजारा दिखा। यहां चित्तौड़ वालों की हवेली से भारी उत्साह, रंग-गुलाल और नकली नोटों की बारिश के बीच एक ‘जिंदा व्यक्ति’ की अर्थी (सनेती) निकाली गई। इस अनूठे रंगोत्सव में 2000 किलो (200 कट्टे) […]
रंगों के पर्व से जुड़ी प्रदेश में कई अनूठी परंपराएं हैं, लेकिन भीलवाड़ा में शीतला अष्टमी पर बुधवार को एक अद्भुत नजारा दिखा। यहां चित्तौड़ वालों की हवेली से भारी उत्साह, रंग-गुलाल और नकली नोटों की बारिश के बीच एक 'जिंदा व्यक्ति' की अर्थी (सनेती) निकाली गई। इस अनूठे रंगोत्सव में 2000 किलो (200 कट्टे) गुलाल उड़ी। इससे शहर की सड़कें पूरी तरह गुलाल से पट गईं।
आयोजन में गजब का हास्य और रोमांच दिखा। संयोजक लादूलाल भांड के अनुसार, परंपरा निभाने के लिए 2000 रुपए का मेहनताना दिया जाता है। पहले अर्थी पर प्रहलाद कुमार को लेटाया गया, लेकिन लोगों के गिराने से वह भाग खड़ा हुआ। बाद में रामस्वरूप शर्मा 'मुर्दा' बने। युवाओं में सनेती (अर्थी) को कंधा देने की होड़ मची रही। तेज गर्मी और चेहरे पर लगातार गिरते गुलाल से बेहाल रामस्वरूप चिल्लाता रहा- रंग कम फेंको, आंखों में जा रहा है। टूटे चश्मे के सहारे लेटे रामस्वरूप ने पानी भी मांगा, लेकिन मुश्किल से एक घूंट नसीब हुआ। बड़े मंदिर के पीछे बहाला पर पहुंचते ही यह मुर्दा अर्थी से कूदकर भाग निकला। इस हास्य-विनोद से भरी शवयात्रा को देखने के लिए सिटी कंट्रोल रूम, सरकारी दरवाजा और गोलप्याऊ चौराहे से लेकर महाराणा मार्केट तक पहली बार महिलाओं, युवतियों और बच्चों की भारी भीड़ उमड़ी।