श्रावकों ने जैन मंदिरों में जाकर खेई धूप
भीलवाड़ा
दिगंबर जैन समाज की ओर से पर्युषण पर्व के छठे दिन उत्तम सयम धर्म व सुगंध दशमी के उपलक्ष में सभी दिगंबर मंदिरों में पूजा पाठ की गई। कई परिवारों ने साधु संतों के सानिध्य में ऑनलाइन हो रही पूजा एवं धूप खेने के कार्यक्रम किए। आमलिया को बारी स्थित बड़े मंदिर के प्रवक्ता पवन अजमेरा ने बताया कि प्रशासनिक आदेशों की पालना के साथ सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखते हुए बड़े मंदिर में धार्मिक कार्यक्रम हुए। सुबह मंगला मंगलाष्टक के साथ अभिषेक शांतिधारा हुई । पंडित अशोक सेठी ने ओम का उच्चारण कराया गया एवं उत्तम संयम धर्म के बारे में बताते हुए कहा कि आज का दिन संसार मार्ग से मोक्ष मार्ग की ओर बढऩे का है। जहां असयम होता है वह संसार और जहा संयम होता है वह मोक्ष मार्ग कहलाता है। करीब 15 श्रावको ने घर पर रहकर शांति धारा का पुण्य प्राप्त किया। दोपहर को 3 घंटे के लिए शहर के अधिकांश जैन मंदिर खुले रहे। सभी ने अपनी-अपनी व्यवस्था के हिसाब से धूप खेने के कार्यक्रम किए।
शास्त्रीनगर स्थित पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में कोरोना महामारी से पीडि़त जनमानस के रोग निवारण के लिए मूलनायक पाश्र्वनाथ भगवान पर अभिषेक व शांतिधारा कमलादेवी, जिनेन्द्र, शैलेंद्र, मृदुल, शैलेश पाटनी की। मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि इसके अतिरिक्त पांच अन्य श्रावकों ने भी शांतिधारा कर सभी के निरोगी होने की भावना की।
शान्तिधारा करने वालों में चंद्रकला, राजेश, संजय बडज़ात्या, शांतिदेवी, प्रदीप, दिलीप, प्रवीण, नवीन चौधरी, सुन्दरलाल, अजय, अमित, आलोक गदिया, प्रेमचंद, राजेंद्रकुमार, राकेश सेठी, कमलादेवी, राजेंद्रकुमार, सौरभ, सहिल गंगवाल ने की। प्रवक्ता शेलेन्द्र पाटनी ने बताया कि शुक्रवार को सुगंध दशमी के अवसर पर पूरे भीलवाड़ा के सभी जैन मन्दिरों में धूप खेई गई। इससे आस-पास का वातावरण सुगंधमय हो गया। श्रावक घर पर ही पूजा पाठ कर आत्म कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर रहे है।
बापू नगर स्थित पदम प्रभु दिगंबर जैन मंदिर में श्रावको ने मंत्रोचार के साथ अभिषेक किया। बाद में कन्हैया लाल पाटनी ने आदिनाथ भगवान, ताराचंद अग्रवाल ने शांतिनाथ भगवान एवं राकेश जैन ने पाश्र्वनाथ भगवान पर शांतिधारा की।
ट्रस्ट के मंत्री पूनमचंद सेठी ने बताया कि दोपहर ढाई बजे से मंदिर में पुरुष महिलाएं एवं बच्चों ने प्रभु के दर्शन करते हुए अग्नि पात्र में धूप को अर्पित किया। इससे सारा वातावरण सुगंध स्वच्छ हो गया।