Water Mission Scheme scam Bhilwara जल मिशन योजना घोटाले से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की मंगलवार को राजस्थान के विभिन्न हिस्सों में हुई कार्रवाई के बाद भीलवाड़ा व शाहपुरा जिले में भी जल मिशन योजना के तहत हो रहे विभिन्न निर्माण कार्य भी संदेह के घेरे में आ गए हैं।
Water Mission Scheme जल मिशन योजना घोटाले से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की मंगलवार को राजस्थान के विभिन्न हिस्सों में हुई कार्रवाई के बाद भीलवाड़ा व शाहपुरा जिले में भी जल मिशन योजना के तहत हो रहे विभिन्न निर्माण कार्य भी संदेह के घेरे में आ गए हैं।
10 परियोजनाओं में 1477.35 करोड़
जिले में योजना के तहत 10 परियोजनाओं में 1477.35 करोड़ रुपए के कार्य होने हैं। राज्य में सत्ता बदलने के साथ जल मिशन योजना घोटाले से जुड़े मामले में भाजपा सरकार व ईडी एक्शन में है।
ईडी की कार्रवाई में भीलवाड़ा के चम्बल परियोजना प्रथम के अधीक्षण अभियंता परितोष गुप्ता निशाने पर रहे हैं। गुप्ता के पास अतिरिक्त मुख्य अभियंता (चम्बल प्रोजेक्ट ) का भी अतिरिक्त कार्य भार है। प्रोजेक्ट में अजमेर, नागौर व भीलवाड़ा जिले शामिल है।
गुप्ता के घर ईडी की दबिश
जयपुर में गुप्ता के घर ईडी की दबिश के बाद भीलवाड़ा में भी चम्बल परियोजना और जलदाय विभाग के अफसरों में हड़कम्प मचा है। ईडी ने पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी के ठिकानों के साथ गुप्ता के ठिकानें पर दबिश दी थी। ईडी की कार्रवाई को लेकर गुप्ता से बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने काॅल रिसीव नहीं किया।
जनप्रतिनिधि उठाते रहे मुद्दे
दोनों जिले में योजना के तहत हो रहे कार्यों को लेकर जनप्रतिनिधियों से लेकर ग्रामीण शिकायतें करते रहे है। जिला परिषद व पंचायत समितियों की बैठकों में भी निर्माण कार्य की गुणवत्ता व अधिकारियों के कामकाज व अनियमितता पर सवाल हुए। लेकिन अफसरों से लेकर सरकार ने नजरअंदाज किया।
साढ़े चार लाख कनेक्शन
योजना के तहत वर्ष-2024 तक भीलवाडा व शाहपुरा जिले के सभी ग्रामीण घरों में कुल 4 लाख 46319 जल कनेक्शन करना प्रस्तावित है। जिले में अभी तक 3,32,214 (74.43 प्रतिशत) घरेलू जल संबंध हो चुके हैं।
1816 ग्राम
दोनों जिले में कुल 1816 ग्राम है। वर्ष -24 तक शेष 204995 घरों में नल कनेक्शन होना है। मिशन के तहत भीलवाडा जिले के 1628 ग्रामों को बृहद परियोजना के तहत घर-घर पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 1477.35 करोड़ (10 परियोजनाओ में) की प्रशासनिक एवं वित्तिय स्वीकृति हो चुकी है।