वस्त्रनगरी की जीवन रेखा कहलाने वाले मेजा बांध को भरने के लिए चित्तौड़गढ़ जिले के मातृकुंडिया बांध से छोड़ा गया पानी रविवार रात देर को जिले में प्रवेश कर गया। उचकिया बांध को पार कर पानी ने जिले की सीमा में प्रवेश किया। रास्ते में कोई बाधा नहीं आने पर मंगलवार देर शाम तक पानी के मेजा बांध में प्रवेश करने की सम्भावना है। इससे मेजा बांध का गेज तेजी बढ़ेगा।
वस्त्रनगरी की जीवन रेखा कहलाने वाले मेजा बांध को भरने के लिए चित्तौड़गढ़ जिले के मातृकुंडिया बांध से छोड़ा गया पानी रविवार रात देर को जिले में प्रवेश कर गया। उचकिया बांध को पार कर पानी ने जिले की सीमा में प्रवेश किया। रास्ते में कोई बाधा नहीं आने पर मंगलवार देर शाम तक पानी के मेजा बांध में प्रवेश करने की सम्भावना है। इससे मेजा बांध का गेज तेजी बढ़ेगा। मेजा बांध में पानी की आवक होने पर सिंचाई और पेयजल का पुख्ता बंदोबस्त हो सकेगा।
जल संसाधन विभाग के कनिष्ठ अभियंता धीरज बेनीवाल ने बताया कि मातृकुंडिया बांध के चार गेट एक मीटर तक खोले गए थे। जिसे बढ़ाकर डेढ़ मीटर कर दिया गया। फीडर में भी तेजी से पानी आगे बढ़ रहा है। फीडर का पानी चौबीस घंटे बाद लसाडिया कलां को पार कर गया। फीडर के रास्ते में आने वाले चितौड़गढ़ जिले के सोमी तालाब, करजिया तालाब, उचकिया बांध के गेट को बंद कर दिया गया। ताकी पानी फीडर में आगे बढ़ने में रूकावट नहीं आ सकें। जल संसाधन विभाग का एक दल फीडर पर निगरानी रखे हुए है। मेजा फीडर 58 किलोमीटर लम्बी है। मेजा बांध में मंगलवार देर शम तक पानी पहुंचने की संम्भावना है। जल संसाधन विभाग फीडर पर नजर बनाए हुए है। रास्ते में आने वाले सभी बांधों और तालाब को बंद कर दिया गया। ताकी फीडर का पानी सीधे मेजा बांध पहुंच सकें। उधर, मेजा बांध में चौदह फीट तक पानी पेयजल की के लिए रिजर्व रखा जाता है। उसके बाद शेष पानी को सिंचाई के लिए दिया जाता है।