भीलवाड़ा

कैलाश की ओर लुप्त हो गए थे

उदासीन आचार्य श्रीचंद्र की 526 वी जयंती मनाई
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Updated: 28 Aug 2020, 12:04 AM IST
Were lost towards Kailash in bhilwara
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भीलवाड़ा।
हरी शेवा उदासीन आश्रम में उदासीनाचार्य श्रीचंद्र की 526वी जयंती मनाई गई। कोरोना के चलते आमजन का प्रवेश वर्जित रहा। हंसराम उदासीन ने बताया कि जगद्गुरु श्रीचंद्र का प्राकट्य दिवस पर आश्रम में विराजित गणेशजी का पूजन व श्रीचंद्र की मूर्ति का अभिषेक किया गया। इसमें संत माया राम, राजाराम, गोविंद राम ने भाग लिया। पंडित सत्यनारायण शर्मा ने वैदिक मंत्रोच्चारण किया। शाम को भगवान श्रीचंद्र की स्तुति एवं सत्संग कीर्तन हुआ। इस दौरान हंसराम उदासीन ने कहा कि गुरु अविनाशी मुनि ने श्रीचंद्र महाराज को उदासीन संप्रदाय की दीक्षा देते हुए धर्म संस्कृति और राष्ट्र के उद्धार की प्ररेणा दी। वह सदैव हर सुख दुख को समान भाव से देखते हुए उसमें उदासीन भाव रखते थे। श्री मात्रा साहिब का पाठ वाचन हुआ। श्रीचंद्र सिद्धांत सागर ग्रंथ पर शीश नवाया। आरती के बाद रोट का भोग लगा प्रसाद वितरण हुआ। इस अवसर पर सचिव हेमंत वच्छानी, कन्हैयालाल मोरियानी, देवीदास गेहानी, गोपाल नानकानी व लक्ष्मी नारायण खटवानी उपस्थित थे।
संत मायाराम ने बताया कि श्रीचंद्र जी का जन्म भाद्रपद शुक्ल नवमी संवत 1551 में तलवंडी ननकाना साहिब में हुआ। माता का नाम सुलक्षणा देवी व पिता का नाम गुरुनानक देव उदासी था। चित्तौडग़ढ़ के महाराणा प्रताप को सन् 1576 में श्रीचंद्र जी का दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। 149 वर्ष की आयु में रावी नदी के किनारे शिला पर सवार होकर कैलाश की ओर लुप्त हो गए थे।

योग क्लास में ले रहे कई लोग हिस्सा
भीलवाड़ा . आजाद नगर के मां नर्मदे एफ सेक्टर पार्क में नियमित योग क्लास आयोजित की जा रही है। योग प्रशिक्षक प्रहलाद राय अजमेरा सोशल डिस्टेंस के तहत शरीर में क्षमता बढ़ाने के लिए प्रतिदिन कॉलोनी एवं आसपास के क्षेत्र के हर व्यक्ति को योग के माध्यम से विभिन्न क्रियाएं करवाई जा रही है। मीडिया प्रभारी सुरेश बंब ने बताया की प्रतिदिन योग में क्लास में बच्चे, महिलाएं व पुरुष लाभ ले रहे हैं।

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