अफसर अध्यक्ष और मंत्री महज सदस्य, यह कैसी व्यवस्था... कलक्टर के डीएमएफटी चेयरमैन होने पर विधायक ने उठाया सवाल डीएमएफटी से दिव्यांगों को राहत का मुद्दा विधानसभा में उठाएंगे मेघवाल
शाहपुरा विधायक कैलाश मेघवाल ने सोमवार को कहा कि जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) फंड से दिव्यांगों को सहायता नहीं मिल रही है। प्रधानमंत्री के निर्देशों के बावजूद अनदेखी हुई। विधायक मेघवाल ने खुद को अपराध बोध से ग्रसित बताते कहा कि कमेटी के सभी लोगों से चूक हुई, लेकिन फंड से तत्काल सहयोग के लिए डीएमएफटी के चेयरमैन एवं जिला कलक्टर आशीष मोदी को पत्र लिखा। उन्होंने कहा कि उपखंड अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाते हुए जिले में दिव्यांगों का सर्वे करवाएं और तत्काल फायदा दिलाएं। मेघवाल फंड से दिव्यांगों को राहत दिलाने का मुद्दा विधानसभा में भी उठाएंगे।
अजमेर रोड िस्थत होटल में पत्रकार वार्ता में मेघवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री और संसद के निर्देश के बावजूद दिव्यांग इस फंड के लाभ से वंचित हैं। डीएमएफटी काे छह साल हो गए, लेकिन दिव्यांगों की अनदेखी हुई। जिले के दिव्यांगों की सहायता के लिए डीएमएफटी फंड घोषित किया है, लेकिन न डीएमएफटी कमेटी ने ध्यान दिया और न ही सामाजिक न्याय अधिकारिता विभाग ने। जिले में डीएमएफटी में अभी बारह हजार करोड़ रुपए रखे हैं। इनमें पहला हिस्सा दिव्यांगों का है। दिव्यांगों को चिहिन्त कर लाभ दिलाने के लिए शिविर लगाएं।
अधिकारी की शिकायत
मेघवाल ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री टीकाराम जूली को पत्र लिखा और जिला अधिकारी की दिव्यांगों के प्रति उदासीनता की शिकायत की। मेघवाल ने बताया कि कलक्टर ने आश्वासन दिया कि इस फंड से निरस्त पुराने कार्याें को एक माह में स्वीकृत कर शुरू करा दिया जाएगा। फंड से खर्च और नियम कायदे का मुद्दा विधानसभा में उठाएंगे।
पहले जिला प्रमुख, फिर मंत्री और अब नौकरशाह
मेघवाल ने कहा कि पूर्व में डीएमएफटी का जिला प्रमुख चेयरमैन होता था। फिर जिले के प्रभारी मंत्री को जिम्मा दिया, जो अब सरकार ने जिला कलक्टर को सौंप दिया। विडंबना है कि डीएमएफटी के चेयरमैन तो नौकरशाह हैं और सदस्य सरकार के केबिनेट मंत्री हैं। बैठक में मंत्री को अफसर के सामने बैठना पड़ता है। उन्होंने डीएमएफटी का चेयरमैन जनप्रतिनिधि को ही बनाने की वकालत की।