भीलवाड़ा

इतनी भी क्या लापरवाही, करोड़ों का गोदाम बन गया जंगल

भीलवाड़ा कृषि उपज मंडी समिति में जिले के किसानों के लिए लाखों रुपए खर्च कर बनाया ग्रामीण गोदाम दो दशक से वीरानी में है। मौजूदा हाल यह है कि करोड़ों के गोदाम की जमीन पर अब जंगल पसरा है। नीलामी चबूतरों पर कब्जा होने के बाद ग्रामीण गोदाम की सुध नहीं लेन से जिले के विभिन्न हिस्सों से आने वाले किसानों को आपदा की स्थिति में भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।

2 min read
What is so negligent, it has become a warehouse of crores
What is so negligent, it has become a warehouse of crores

भीलवाड़ा। भीलवाड़ा कृषि उपज मंडी समिति में जिले के किसानों के लिए लाखों रुपए खर्च कर बनाया ग्रामीण गोदाम दो दशक से वीरानी में है। मौजूदा हाल यह है कि करोड़ों के गोदाम की जमीन पर अब जंगल पसरा है। नीलामी चबूतरों पर कब्जा होने के बाद ग्रामीण गोदाम की सुध नहीं लेन से जिले के विभिन्न हिस्सों से आने वाले किसानों को आपदा की स्थिति में भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।

गोदाम खुला ही नहीं
जिले के विभिन्न हिस्सों से आने वाले किसानों के लिए राज्य सरकार के निर्देश पर मंडी प्रशासन ने मंडी परिसर में ही दो दशक पूर्व आठ हजार स्कवायर फीट की साइज में ग्रामीण गोदाम का निर्माण कराया था। लेकिन मंडी प्रशासन की अनदेखी से गोदाम व्यापारियों व किसानों के लिए कभी खुला ही नहीं, हालात यह हो गए कि उपयोग के अभाव में ये गोदाम उजाड़ हो गया, वक्त बीतने के साथ चोर यहां से चद्दर, सरिए, किवाड़, खिड़की तक खोल कर ले गए। अभी गोदाम पूरी तरह से खण्डहर हो चुका है और बम्बूल के जंगल तक यहां फैल गया है।

सस्ती जमीन पर नजर
मंडी, व्यापारी, हमाल व किसान बताते है कि गोदाम उपयोग के अभाव में कचराघर बन गया है, कीचड़ व गंदगी फैले रहने से यहां लोगों का आना जाना भी दुर्भर रहता है, क्षेत्र वीरान होने से यहां आसपास आवारा तत्व व शराबियों का डेरा लगा रहता है। कई लोग तो यहां शौच तक करते है। बेशकीमती गोदाम की जमीन को सस्ते दामों में लेने के खेलने से गोदाम का मामला कोर्ट से लेकर सरकारी फाइलों में अटका हुआ है। यदि मंडी प्रशासन गोदाम की सुध लेता और प्रकरण का निस्तारण कर विकास करता तो जिले के बाहर से आने वाले किसानों को बड़ी राहत मिलती।

मंडी दर बाजार से कही कम
गोदाम की उपयोगिता को लेकर मंडी प्रशासन ने १५ साल पूर्व गोदाम को बेचने की तैयारी की थी, मंडी के ही कर्मचारी ने पत्नी के नाम से आवेदन कर दिया, एक लाख रुपए भी जमा हो गए, लेकिन आपत्ति आने पर सरकार ने आवंटन रोक दिया। इस रोक के बाद समूचा मामला न्यायालय मंें चला गया, इसके बाद मंडी प्रशासन ने भी प्रकरण की निस्तारण में गंभीरता नहीं दिखाई, लेकिन सरकार की नई गाइड लाइन के आने बाद समूचा प्रकरण वापस लेने की स्थिति में गोदाम को बेचने की राह खुल जाएगी।

नई गाइड लाइन के बाद सभी की नजर मंडी की जमीन पर टिकी है। मंडी में जमीन यदि सरकार बेचती है तो उसकी दर अभी २०५० रुपए स्कवायर फीट है। जबकि बाजार दर करीब १५००० रुपए स्कवायर फीट है।

अभी पता नहीं, लेकिन कर लेंगे
ग्रामीण गोदाम की सुविधा मिलें तो जिले के किसानों को बेहतर सुविधा मिलेगी, गोदाम की मौजूदा स्थिति क्या है और किस स्थिति में इसकी जानकारी हाल ही कार्यसंभालने से नहीं है। इस संदर्भ में पूरी जानकारी की जाएगी
बालकिशन शर्मा, सचिव, भीलवाड़ा मंडी

Published on:
31 Jul 2020 10:35 am