मोबाइल फोन के प्रति आसक्ति बच्चों के दिलो-दिमाग पर इस कदर दुष्प्रभाव डाल रही है कि वे कुछ भी करने से नहीं चूक रहे। ऐसा ही कुछ उदयपुर के एक 13 वर्षीय स्कूली छात्र के साथ हुआ। घरवालों ने मोबाइल फोन नहीं दिलाया तो नाराज होकर घर छोड़ दिया और ट्रेन में बैठ कर चित्तौड़गढ़ आ गया। maan ne mobail nahin diya to tren mein baith gaya
दरअसल, उदयपुर से चित्तौडग़ढ़ आने वाली गाड़ी संख्या 29006 से चितौडग़ढ़ स्टेशन पर आरपीएफ थाना के हैड कांस्टेबल यादराम मीणा ने एक बालक को प्लेटफार्म नंबर छह पर अकेले स्कूल ड्रेस में बैग के साथ घूमते देखा। इस पर मीणा व मुकेश कुमार ने तुरन्त प्लेटफार्म पर पहुंच कर बालक से यहां आने का कारण पूछा। उन्होंने बाल कल्याण समिति अध्यक्ष प्रियंका पालीवाल को सूचना देकर बालक को समिति के समक्ष पेश किया।
समिति की ओर से बालक की काउंसलिंग की गई। बालक ने उदयपुर का होना बताया। स्कूल डायरी से बालक की सम्पूर्ण जानकारी ली गई। बालक की उम्र 13 वर्ष है व माता से मोबाइल नहीं देने के कारण नाराज होकर स्कूल न जाकर ट्रेन से चित्तौडग़ढ़ आ गया।
बालक की मां से सम्पर्क किया गया। बालक के परिवारजनों के चित्तौडग़ढ़ पहुंचने तक बालक को मोबाइल के दुष्प्रभाव व उनसे होने वाली मानसिक समस्याओं की जानकारी सौहार्दपूर्ण वातावरण में बिठा कर अध्यक्ष पालीवाल, सदस्य शिवदयाल सिंह लखावत व ओम प्रकाश लक्षकार द्वारा दी गई।