भीलवाड़ा

peacocks increased in bhilwara मोर का कुनबा बढ़ा तो हुए सब खुश

When the family of peacocks increased, everyone was happy भीलवाड़ा जिले का शभुकंर मोर, अब जिले में कुनबा बढ़ाने लगा है। विलुप्त होने की स्थिति में पहुंचे मोरों की आबादी वन क्षेत्र के साथ ही गांवों में फिर से बढऩे से ग्रामीण खुश है, जिले में वन विभाग व वन्य जीव सरंक्षण समितियां भी राष्ट्रीय पक्षी मोर के संरक्षण के लिए प्रयासरत है।

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मोर का कुनबा बढ़ा तो हुए सब खुश
मोर का कुनबा बढ़ा तो हुए सब खुश

When the family of peacocks increased, everyone was happy भीलवाड़ा जिले का शभुकंर मोर, अब जिले में कुनबा बढ़ाने लगा है। विलुप्त होने की स्थिति में पहुंचे मोरों की आबादी वन क्षेत्र के साथ ही गांवों में फिर से बढऩे से ग्रामीण खुश है, जिले में वन विभाग व वन्य जीव सरंक्षण समितियां भी राष्ट्रीय पक्षी मोर के संरक्षण के लिए प्रयासरत है।


शुभंकर की अब पहचान

प्रदेश में वन्य जीव संरक्षण के तहत राज्य सरकार ने जिलों में घटते स्थानीय वन्य जीवों की संरक्षण की दशा में अहम कदम उठाया था। इसी के तहत वन विभाग ने मार्च २०१६ में जिलों में अपने अपने शुभंकर घोषित किए और उनके संरक्षण का बीड़ा उठाया। भीलवाड़ा जिले में वन विभाग ने राष्ट्रीय पक्षी मोर को शुभंकर घोषित किया। इस पर वन विभाग ने मोर के संरक्षण की दशा में कदम उठाए थे। जिले में मोर अब सुरक्षित एवं संरक्षित है और कुनुबा भी बढऩे लगा है।

पीहू-पीहू अब सुनने लगे है

बड़े बुजुर्ग बताते है कि 70 व 80 के दशक में जिले के अधिकांश गांवों में मोर हुआ करते थे, वह वन क्षेत्र व गांवों में सुरक्षित रहते थे। इनकी संख्या जिले में बीस हजार से अधिक ही थी, लेकिन मोरों का संरक्षण नहीं होने, शिकारियों की तादाद बढऩे से जिले में मोरों की संख्या सिमटने लगी थी, लेकिन गत पांच साल के दौरान फिर मोरों की आबादी बढऩे की जानकारी आना शुभ संकेत है। मोर की पीहू-पीहू की स्वरलहरी भी अब आनन्द देने लगी है।

सात साल में बढ़ी आबादी

वन्य जीव गणना के अनुसार जिले में वर्ष 2015 में 695 मोर ही पाए गए, इसके बाद मोरों की संख्या में बढ़ोतरी हुई। वर्ष 2017 में 824, 2020 में 1169 व वर्ष 20200 की वन्य जीव गणना में 1076 मोरों की मौजदूगी मिली। हालांकि मोरों की विशेष गणना के दौरान मोरों का कुनबा छह गुणना तक बढ़ा नजर आया। वर्ष 2021 में जिले में कुल 6192 मोर पाए गए, वही 2022 में यह आंकड़ा 6735 पहुंच गया। जिले में गंगापुर, भीलवाड़ा, जहाजपुर व आसीन्द रेंज क्षेत्र में मोरों की संख्या अधिक है।

बढ़ती आबादी अच्छा संकेत

जिले में एक जमाने में मोर ही मोर थे। यह संख्या अब घटती जा रही है, हाल के वन्य जीव गणना के जो आंकड़े सामने आए है, वह मन को संतोष देने वाले है। एक मोटे के अनुमान गणना से भी दुगनी आबादी अब मोरों की नजर आने लगी है। जिले के शुभंकर मोर का अस्तित्व बचाए रखने के लिए अभी भी ओर संरक्षण की जरूरत है।

. बाबू लाल जाजू, प्रांतीय संयोजक, पीपुल फोर एनीमल्स
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हमारे शुभकंर को पूरा संरक्षण

वन विभाग ने राष्ट्रीय पक्षी मोर को वर्ष 2016 में जिले का शुभकंर घोषित किया था, जिले में मोरों की संख्या लगातार बढ़ रही हे। मोरों के संरक्षण के लिए वन्य जीव संरक्षण समितियों की भी मदद ली जा रही है, ग्रामीणों व वन रक्षकों को जागरूक किया जा रहा है, शिकारियों पर भी शिकंजा कसा जा रहा है, गत दो साल में मोर के शिकार दो केस दर्ज हुए है।

. डीपी जागावत, उपवन संरक्षक, भीलवाड़ा

Published on:
31 May 2022 01:14 pm