भीलवाड़ा

क्यूं तरस गया पर्यटकों को, हमीरगढ़ इको पार्क

प्रदेश का प्रमुख इको पार्क होने के बावजूद हमीरगढ़ इको पार्क को देश के पर्यटन नक्शे मेंं जगह नहीं मिल सकी है। देश में अस्तिव की पहचान के लिए संघर्ष कर रहे हमीरगढ़ इको पार्क पर कोरोना संकट के साथ ही मोटी प्रवेश राशि की भी दोहरी मार हो रही है। तिहरे संकट से हमीरगढ़ स्थित इको पार्क पर्यटकों से ही दूर होता जा रहा है। हालात यह है कि पार्क में इन दिनों सन्नाटा ही पसरा हुआ है।

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Why have tourists been disappointed, Hamirgarh Eco Park


भीलवाड़ा। प्रदेश का प्रमुख इको पार्क होने के बावजूद हमीरगढ़ इको पार्क को देश के पर्यटन नक्शे मेंं जगह नहीं मिल सकी है। देश में अस्तिव की पहचान के लिए संघर्ष कर रहे हमीरगढ़ इको पार्क पर कोरोना संकट के साथ ही मोटी प्रवेश राशि की भी दोहरी मार हो रही है। तिहरे संकट से हमीरगढ़ स्थित इको पार्क पर्यटकों से ही दूर होता जा रहा है। हालात यह है कि पार्क में इन दिनों सन्नाटा ही पसरा हुआ है।
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बजट का इंतजार
वन विभाग ने हमीरगढ़ इको पार्क पर २४ लाख किए और यहां टूरिस्ट हट, प्वाइंट व्यू, वॉच टावर व गेस्ट हाउस की सुविधा जुटाई। लेकिन पार्क को और अधिक आकर्षक व भव्य बनाने तथा पूर्ण रूप से सुरक्षित करने के लिए विभाग के पास बजट का टोटा है। ऐसे में यहां घूमने के लिए आने वाले लोगों को पूरी सुविधाओं नहीं मिल पा रही है। यहां प्रवेश शुल्क भी भारी लग रहा है।
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पन्द्रह किमी में फैला
पार्क प्रभारी देवकृष्ण दरोगा ने बताया कि इको पार्क में भीलवाड़ा शहर से महज १५ किलोमीटर की दूरी पर हमीरगढ़ उपखंड मुख्यालय में इको पार्क स्थित है। यहां जंगली सुअर, हिरण, सेही, जरख, सियार, लोमडी, खरगोश, तीतर, चिंकारा, मोर समेत विभिन्न प्रजाति के वन्य पक्षी व पशु है। इन्ही वन्य जीवों को देखने के लिए प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से लोगों आते है। इसी प्रकार वन क्षेत्र पचास से अधिक प्रजातियों के पौधे व पेड़ जैव सम्पदा को समेटे हुए है।
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लुभाती है कलात्मक रैलिंग
ईको पार्क घना वन क्षेत्र होने से यहां बड़े वृक्ष है, विभिन्न प्रजातियों के पेड़ भी यहां है। कुण्डों से निकलने वाला पानी अभी सूखा है लेकिन बारिश में कलकल करता हुआ आंदित करता है। यहां कलात्मक रैलिंग लुभावनी है। यहां पहाड़ की गोदी में बने मंशा महादेव मंदिर व चामुंडा मंदिर पर बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते है। यहां ऊंचाई पर सन सेट प्वांइट से शहर व सूर्यास्त का मनोरम दृश्य दिखाई देता है। यहां वॉच टॉवर भी लुभाता है।
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ये है प्रवेश शुल्क
यहां भारतीय नागरिक को प्रवेश शुल्क के साथ ही इको डेव के लिए ५० रुपए देने होंगे। जबकि विदेशी नागरिक पर ये शुल्क ३०० रुपए है। जबकि विद्यार्थियों को रियायत देते हुए उनके लिए ये राशि २५ रुपए तय है। इसी प्रकार यहां बने गेस्ट हाउस के विशेष रूम का किराया ७०० रुपए व साधारण कक्ष का किराया ३०० रुपए है। जबकि टूरिस्ट हट (झोपड़ी) का किराया प्रतिदिन ३०० रुपए तय है।
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पर्यटन नक्शे पर आने से आएंगे पर्यटक
इको पार्क के विकास एवं विस्तार के लिए सरकार से बजट मांगा है, कोरोना संक्रमण काल से पर्यटकों की आवाजाही नाम मात्र की है। गत वर्ष यहां रोजाना २० से २५ परिवार घूमने आते थे, लेकिन यह संख्या महज ५-७ ही रह गई है। यहां प्रवेश शुल्क लम्बे समय से नहीं बढ़ाया। इको पार्क को देश के पर्यटन नक्शे पर लाना चाहिए।
-डीपी सिंह जागावत, उपवन संरक्षक, भीलवाड़ा

Published on:
29 Nov 2020 12:25 pm
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