You also know, who will handle their responsibility now at bhilwara चुनावी कमान संभालना आसान नहीं हैं, कई चुनौतियां झेलनी पड़ती है। भीलवाड़ा कलक्ट्रेट में भी चुनावी व्यवस्थाओं की कमान चुनौती पूर्ण तरीके से सालों से वरिष्ठ साथी ही संभाले हुए थे, लेकिन इसी माह उनका रिटायरमेंट तय है। इससे कलक्ट्रेट में कुशल चुनाव प्रबंधन पर चिंता बढ़ी हुई है। चर्चा है कि कोई भी यह जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है, जिनको यह जिम्मेदारी दी जा रही है, वह भी इससे मुक्ति के लिए अभी से राह तलाशने लगे हैं
भीलवाड़ा। चुनावी कमान संभालना आसान नहीं हैं, कई चुनौतियां झेलनी पड़ती है। भीलवाड़ा कलक्ट्रेट में भी चुनावी व्यवस्थाओं की कमान चुनौती पूर्ण तरीके से सालों से वरिष्ठ साथी ही संभाले हुए थे, लेकिन इसी माह उनका रिटायरमेंट तय है। इससे कलक्ट्रेट में कुशल चुनाव प्रबंधन पर चिंता बढ़ी हुई है। चर्चा है कि कोई भी यह जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है, जिनको यह जिम्मेदारी दी जा रही है, वह भी इससे मुक्ति के लिए अभी से राह तलाशने लगे हैं
साहेब तो मिटिंग में है व्यस्त
अफ सर मेहरबान तो फि र आप मान सकते हैं कि कर्मचारी के हौसले कितने बुलंद होते है। एवीएनएल के आला अधिकारी का अधिकतर समय मीटिंग में ही गुजरता है। यहां के स्टाफ जुबां पर अकसर यही रहता है कि साहेब आज मीटिंग में व्यस्त हैं, लेकिन यह मीटिंग कब और कहां होती है किसे पता नहीं रहता है। चर्चा है कि आला अधिकारी के कार्यालय में अकसर मौजूद नहीं रहने से अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों की भी मौज हो रही है। इतना ही नहीं जब वह अपने कक्ष में मौजूद रहते हैं तो, उन्हें उनके ही खास घेरे रहते हैं। ऐसे में आम जनता की उन तक पहुंच दूर ही होती जा रही है।
उनकी तो कोई नहीं सुनता
जनता ने जिताया है और यदि उनके काम नहीं हो तो फि र उनकी खरी खोटी भी सुननी पड़ती है। शहर के अधिकांश पार्षदों के हाल यही हैं, इनमें सर्वाधिक पीड़ा भाजपा पार्षदों को ही झेलनी पड़ रही है नगर परिषद हो या नगर विकास न्यास सभी में उनकी सुनवाई फ ाइलों में ही दबी हुई है। चर्चा है कि स्थानीय निकाय के अधिकारी सत्ताधारी पार्टी के पार्षदों को ही अधिक तवज्जो दे रहे है, इनमें दमदार पार्षदों के वार्ड में तो विकास की गंगा बह रही है, जबकि अन्य पार्टी या फि र निर्दलीयों को सिर्फ आश्वासनों का झुनझुना ही अधिकारी थमा रहे हैं
जयपुर तक है चर्चा में
प्रदेश में सत्ता एवं ब्यूरोक्रेसी में दबदबे को लेकर कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम चर्चा में रहते हैं लेकिन एक महिला आरएएस अधिकारी के सत्ता की राजनीति में दबदबे की चर्चा भी इनदिनों आम है। चर्चा तो यह है कि यह महिला अधिकारी लंबे समय से भीलवाड़ा जिले में तैनात हैं, लेकिन किसी भी महिला अधिकारी के अभी तक कोई तीखे तेवर जिले की राजनीति में देखने को नहीं मिले हैं। ऐसे में जिले की ब्यूरोक्रेसी में भी एक नाम पर चर्चा खास है।
दोहरे लाभ, कहने वाला कोई नहीं
कोरोना संकट के बादल अब छंटने लगे हैं, इसके बावजूद सरकारी महकमों में सुस्ती छाई हुई है । कई कर्मचारियों व शिक्षकों की पहले भी मौज थी, कोरोना ने मौज और बढ़ा दी है। चर्चा है कि वह सरकारी जिम्मेदारी छोड़कर निजी व्यवसाय के साथ ही प्रॉपर्टी के धंधे मे अब फू ल रहे हैं। शिकायत तो यह भी कि वह ऑफि स व स्कूल में कम और खुद के फील्ड में ज्यादा रहने के बावजूद उन्हें कहने वाला कोई नहीं है।
- नरेन्द्र वर्मा You also know, who will handle their responsibility now at bhilwara