तन-मन और आत्मा को साधने वाला, बदलने वाला, स्वस्थ रखने वाला योग गांव-गांव तक फैले और स्वस्थ-सुंदर भारत वैश्विक नेतृत्वकारी भूमिका में दिखे, इस जुनून के साथ भिण्‍ड के स्‍वामी जीतानंद पिछले 20 वर्ष से कार्य कर रहे हैं।
भिण्ड. छोटे कस्बे अकोड़ा से निकलकर ऋषिकेश में संस्था स्थापित कर पूरे देश में शिविर लगाए। स्कूल-कॉलेजों में छात्र और शिक्षकों को टीटीसी(टीचर ट्रेनिंग कोर्स) का प्रशिक्षण देकर 250 योगा शिक्षक तैयार किए हैं। यह शिक्षक देश ही नहीं चायना, इटली, स्विटजरलैंड, कनाडा, आस्ट्रेलिया सहित कई देशों में योग की कला का विस्तार कर लोगों को गंभीर बीमारियों से छुटकारा दिला रहे हैं।
उद्देश्य: छात्रों को योग से जोड़ना:
योग को छात्रों के दैनिक जीवन में शामिल करने के लिए जीतानंद अब स्कूलों में व्यापक स्तर पर कैंप लगा रहे हैं। जुलाई माह में वह जिले के बड़े स्कूलों में शिविर लगाकर छात्र और शिक्षकों को योग सिखाएंगे। योग गुरु बताते हैं कि उन्होंने इंटरनेशन योगा में भाग लेकर हजारों लोगों को योग से जोड़ा है। देहरादून में योगा फेस्टिबल में भाग लिया है। लेकिन अब इस कला को आगे बढ़ाने के लिए युवाओं को योग शिक्षक के रूप में खड़ा करना है। योग का वास्तिविक अर्थ ध्यान योग होता है। आध्यात्मिक जीवन में योग की जितनी आवश्यकता है उतना ही विद्यार्थी जीवन में योग का महत्व है। योग करने से पढ़ाई में मन लगता है। योग में दिव्य मुद्राएं, आसन, सूत्र नेति विश्व विख्यात है। सूत्र नेति करने से कफ के रोगों का नाश होता है, वहीं आंखों की रोशनी बनी रहती है।
45 वर्ष की उम्र में जागी प्रेरणा:
स्वामी जीतानंद आम लोगों की तरह गृहस्थ जीवन में परिवार के साथ जीवन व्यतीत कर रहे थे। उन्होंने बताया कि वर्ष 2002 में प्रेरणा जागी तो योग की ओर बढ़ गए। साधना और योग के निरंतर अभ्यास से खुद के 150 योगाशन खोजे और लोगों को योग की शिक्षा देने लगे। 65 वर्ष की उम्र में भी बाबा रामदेव की तरह देश के अलग-अलग राज्यों में शिविर लगाकर लोागें को योग से जोड़ रहे हैं।