
भिण्ड. ओलावृष्टि से जिले के एक सैकड़ा से अधिक गांवों में किसानों की फसल तबाह हो गई है। रविवार को जनप्रतिनिधियों के साथ अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में प्रभावित गांवों का निरीक्षण किया। मौ क्षेत्र में आसमान से आई तबाही ने लोगों की फसलें ही नहीं, आशियाने भी छीन लिए। सलमपुरा में आधा दर्जन लोगों के मकान ढह गए, लेकिन प्रशासन का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचा। इसके विरोध में सलमपुरा के ग्रामीणों ने दोपहर मौ-चितौरा रोड पर चक्काजाम कर दिया। सूचना लगते ही गोहद विधायक केशव देसाई, तहसीलदार पवन ङ्क्षसह और टीआई रघुवीर मीणा ने ग्रामीणों को समझाइश दी तब आधे घंटे बाद जाम खोला गया।
बता दें ओलावृष्टि के साथ तेज बारिश और तूफान ने लोगों का जनजीवन अस्त व्यस्त कर दिया है। मेहगांव, गोहद, मौ, भारौली और अमायन क्षेत्र के 50 से अधिक गांवों में बिजली के खंभा और लाइनें उखड़ जाने से बिजली ठप है। रविवार को बिजली कंपनी के कर्मचारियों ने कुछ गांवों में मेंटेनेंस कर सप्लाई बहाल की। गांवों में हुई ओलावृष्टि से किसानों के खेतों में 70 प्रतिशत तक नुकसान है। अमायन, बिरखड़ी, सलमपुरा सहित कई गांवों में सौ प्रतिशत तक नुकसान बताया जा रहा है। वहीं प्रशासन ने अभी तक सर्वे दल गठित नहीं किए हैं। जिससे किसानों में शासन व प्रशासन के खिलाफ आक्रोश है।
आपदा का कहर जिले के किसानों पर सबसे अधिक टूटा है। अमायन क्षेत्र में तीन घंटे हुई झमाझम बारिश, ओलावृष्टि और तेज आंधी से फसलें खराब हो गई हैं। खेतों में कटी रखी फसल पानी में तैर रही है। रविवार को कैबिनेट मंत्री राकेश शुक्ला और एसडीएम नवनीत शर्मा, कर्मचारियों के साथ क्षेत्र में पहुंचे तो किसानों ने अपनी पीढ़ा जाहिर की। किसान कैलाश राजौरिया और हरि बरेठा ने बताया कि हम बर्बाद हो गए। साल भर की मेहनत पर आसमान से गिरी आफत ने पानी फेर दिया है। मंत्री ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि उनके नुकसान की भरपाई सरकार करेगी। जल्द ही सर्वे कार्य शुरू किया जाएगा।
लहार. लहार क्षेत्र सहित आसपास के कई इलाकों में बीते दिनों प्रकृति का जबरदस्त कहर देखने को मिला है। अचानक हुई भीषण ओलावृष्टि और मूसलाधार बारिश ने किसानों के चेहरे की मुस्कान छीन ली है। खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह से बिछ गई हैं, जिससे अन्नदाता की साल भर की खून-पसीने की कमाई मिट्टी में मिल गई है। सरकार किसानों को सौ फीसदी मुआवजा दे। यह बात डॉ गोङ्क्षवद ङ्क्षसह ने कही है। उन्होंने कहा लहार, मछण्ड, ङ्क्षभड और श्योपुर के कई गांवों में स्थिति बेहद ङ्क्षचताजनक है। किसानों की इस बदहाली पर पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ गोङ्क्षवद ङ्क्षसह ने गहरी संवेदना व्यक्त की है। डॉ. ङ्क्षसह ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि बिना किसी देरी के राजस्व विभाग की टीमों को खेतों में भेजकर तत्काल सर्वे कराया जाए।
ओलावृष्टि में केवल फसल ही नहीं, बल्कि पक्षियों को भी भारी नुकसान हुआ है। भारौली में आधे घंटे गिरे ओले से पेड़ों पर आश्रय पा रहीं हजारों गौरैया मर गईं। रविवार की सुबह ग्रामीणों ने घरों के बाहर गौरैया को मृत देखा तो प्रशासन को सूचना दी। गांवों में कई जगह मोर मृत हुए हैं। ओलावृष्टि से चिटावली, गोरम, आंतो, कुपावली आदि गांवों में किसानों की फसल पूरी तरह से खराब हो गई है। किसान खेतों से पानी निकाल रहे हैं। फसल में पानी भरने से सडऩे का खतरा बढ़ गया है।
Updated on:
06 Apr 2026 12:16 am
Published on:
06 Apr 2026 12:16 am
