सरसों उत्पादक किसान खरीद केंद्रों पर हो रहे हैं परेशान, अब तक ८८३ ने बेची सरसों, बटाईदार, किराएदारों को नहीं मिली सुविधा, खुले बाजार में बेचने को मजबू
भिण्ड. समर्थन मूल्य पर सरसों खरीदने के लिए केंद्र स्थापित किए जाने के बाद भी कुदरती कोप से जूझते आ रहे किसानों को राहत मिलती दिखाई नहीं दे रही। इस बार सरसों की बंपर पैदावार ही किसानों के लिए मुसीबत का सबब बन गई है। एक हैैक्टेयर में २६ क्विंटल तक सरसों की पैदावार हुई है लेकिन सरकार 13 क्विंटल से ज्यादा खरीदनें को तैयार नहीं हो रही। शेष बची हुई सरसों को बेचने के लिए किसानों को व्यापारियों के यहां दस्तक देनी पड़ रही है।
प्रदेश में सरसों की खरीद 15 अप्रैल से शुरू हो गई थी लेकिन भिण्ड में भारत बंद के दौरान हुई हिंसा के कारण 20 अप्रैल के बाद ही खरीद केंद्र चालू हो जाए।सहालग का सीजन और अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए तब तक 60 फीसदी से अधिक किसान व्यापारियों को औने-पौने भाव में फसल बेचने को मजबूर होना पड़ा है। समर्थन मूल्य पर सरसों बेचने के इच्छुक किसानों को मैसेज का इंतजार करना पड़ रहा है। कई किसानों को तो लापरवाही पूर्ण मैसेज भेजे जा रहे हैं।सबसे बड़ी समस्या उन किसानो के साथ है जिन्होंने दूसरे की जमीन किराए पर लेकर सरसों बोई थी या फिर किसी किसान के साथ बटाईदारी की भूमिका में थे। इन किसानों को समर्थन मूल्य पर फसल बेचने के लिए पंजीयन का कोई विकल्प ही नहीं दिया गया। ऐसे किसानों को व्यापारियों को सस्ते भाव में फसल बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा है। फसल बेचने के बदले खाते में आने वाली राशि में से ही ऋण राशि काटे जाने के डर से भी किसान खरीद केंद्रों पर सरसों बेचने के लिए बाध्य हैं।
केस-१
हैवतपुरा निवासी कमलेशसिंह यादव ने इस बार ५ हैैक्टेयर में सरसों की फ सल बोई थी। फसल अच्छी होने से इस बार २६ क्विंटल सरसों की पैदावार हुई थी। कमलेश पंजीयन कराने के बाद १५ दिन तक मैसेज आने का इंतजार करते रहे। दो दिन पहले मैसेज तो आया लेकिन सिर्फ १५ क्विंटल बेचने का। जबकि सरकारी नियमों के अनुसार ही कमलेश को ६५ क्विंटल का मैसेज आना चाहिए। कमलेश की समस्या यह कि अब वो अपनी १० क्विंटल सरसों कहां पर ले जाए।
केस-२
जौरी का पुरा निवासी संजू ने गांव में ही दूसरे किसानों की १५ बीघा खेती में बटाईदारी पर सरसों की पैदावार की थी। संजू क ो हिस्सें में करीब ३५ क्विंटल सरसों मिली है। जमीन न होने के कारण समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए पंजीयन की सुविधा नहीं दी गई। संजू को व्यापारिया के हाथ सरसों बेचने के बाद करीब २१ हजार रुपए का नुकसान उठाना पड़ा है। जौरी का पुरा में ही ऐसे किसानों की संख्या दर्जनों में है।
-बटाईदार किसानों की संख्या भी हजारों में है लेकिन इनको अनदेखा कर दिया गया है। पैसे की अभी जरूरत है। समर्थन मूल्य पर बेचे तो किसी पंजीकृत किसान का ही सहारा लेना पड़ेगा।
राजू धाक रे किसान बिछौली
-सुबह से फसल लेकर आ गए थे दोपहर के दो बज चुके है अभी तक नंबर तौल का नहीं आया है। यहां पर पेयजल की भी व्यवस्था नहीं है। समस्या का समाधान करने के लिए भी कोई नहीं हैं।
नाथूराम किसान शुक्लपुरा
-तकनीकि खामी के कारण कुछ किसानों पर गलत मैसेज आ गए है। पंजीकृत रकवे की १३ क्विंटल प्रति हैैक्टेयर की दर से खरीद की जा रही है। यदि किसी किसान के सामने समस्या है तो उसका समाधान किया जाएगा।
एनएस परमार जिला विपणन अधिकारी भिण्ड