जिला अस्पताल परिसर में संचालित अटल आश्रय का भी 10 साल से अधिक समय से संचालन किया जा रहा है। पहले यहां एनआरसी का संचालन होता था, बाद में यहां आश्रय स्थल शुरू किया गया। 10 पलंग की क्षमता वाले आश्रय स्थल में केवल तीन लोग ठहरे हैं, जो कोई यात्री नहीं बल्कि निराश्रित और बीमार लोग हैं।
भिण्ड. पुराने बस स्टैंड परिसर में 20 साल से भी अधिक समय से संचालित रैन बसेरे में पलंग तो पर्याप्त हैं, लेकिन रुकने वाले नहीं आते। एक वजह तो बस स्टैंड के आसपास का खराब माहौल है, दूसरा भवन और बिस्तरों की बदहाली। जिससे लोगों का यहां रुकने का मन नहीं करता। जिला अस्पताल परिसर में संचालित अटल आश्रय स्थल का तो और भी बुरा हाल है।
पत्रिका टीम ने शाम करीब छह बजे बस स्टैंड परिसर में संचालित रैन बसेरे को देखा तो महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग दो कक्ष हैं। जिनकी क्षमता 10-10 पलंग की है, लेकिन इनके बिस्तरों की स्थिति ठीक नहीं है। पुराने और मैले से चादर बिछे हैं और छह-सात डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच भी एक ही कंबल उपलब्ध कराया जाता है। रैन बसेरे में एक कर्मचारी उपलब्ध था, लेकिन कोई भी आगंतुक नहीं था। जब एक ही कंबल को लेकर सवाल किया तो कर्मचारी ने कहा कि यदि बच जाते हैं तो दो कंबल दे देते हैं और ज्यादा दिक्कत आती है तो रूम हीटर चालू करवा देते हैं। लेकिन जहां कर्मचारी बैठते हैं, उस कक्ष की खिड़कियां खुली हैं।
जिला अस्पताल परिसर में संचालित अटल आश्रय का भी 10 साल से अधिक समय से संचालन किया जा रहा है। पहले यहां एनआरसी का संचालन होता था, बाद में यहां आश्रय स्थल शुरू किया गया। 10 पलंग की क्षमता वाले आश्रय स्थल में केवल तीन लोग ठहरे हैं, जो कोई यात्री नहीं बल्कि निराश्रित और बीमार लोग हैं। उत्तरप्रदेश के चक्करनगर निवासी विष्णु चौहान के दाएं पैर में फ्रेक्चर है, डेढ़ माह से अस्पताल में भर्ती थी, चिकित्सकोंं ने घर जाने को कहा तो उन्होंने बताया कि उनका घर यहां नहीं है। तब चिकित्सकों ने रैन बसेरे में शिफ्ट कर दिया। एक और बुजुर्ग चलने-फिरने और बोलने में भी लाचार हैं, उनके भी यहीं व्यवस्था की है। लेकिन यहां भी एक कंबल ही दिया जा रहा है।
पुराने बस स्टैंड परिसर में संचालित रैन बसेरे में दिसंबर माह में करीब 20 लोग ही ठहरे हैं। इनमें अधिकांश उत्तरप्रदेश के रहने वाले हैं। दो महिलाएं भी ठहरी हैं। मैनपुरी, कासगंज, फिरोजाबाद, जालौन, शाहजहांपुर, दिल्ली एवं नागपुर तक के लोग ठहरे हैं। 15 दिन पहले ठहरे एक व्यक्ति ने बताया कि पहली बार रैन बसेरे में ठहरे तो वहां पुराना भवन होने व्यवस्थाएं कम होने से अच्छा नहीं लगा, इसलिए अब धर्मशाला या रिश्तेदार के यहां रुक जाते हैं।
नवंबर माह में नगरपालिका की ओर से अध्यक्ष प्रतिनिधि सुनील वाल्मीकि और सीएमओ यशवंत वर्मा ने दोनोंं रैन बसेरों में दो-दो रूम हीटर दिए थे। बस स्टैंड वाले रैन बसेरे में तो चालू मिले, लेकिन अस्पताल परिसर में गायब मिले। कर्मचारियों का कहना था कि खराब हो गए थे, फिर पता नहीं चला कहां गए।
रैन बसेरों में व्यवस्थाएं तो की हैं, ज्यादा सर्दी में रूम हीटर का भी इंतजाम किया है। यदि खराब हुए हैं तो बताना चाहिए था, हम फिर निरीक्षण करेंगे और जरूरत के हिसाब से कंबल व रूम हीटर की व्यवस्था करवाएंगे।
वर्षा वाल्मीकि, अध्यक्ष, नपा भिण्ड