भिवाड़ी. एक तरफ भिवाड़ी में जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए पूरा तंत्र जुटा हुआ है। दूसरी तरफ नजदीकी चौपानकी पथरेड़ी औद्योगिक आवासीय क्षेत्र के सीवर प्रोजेक्ट का मामला डीपीआर निर्माण के बाद भी शासन स्तर पर अटका हुआ है। इस मामले में लंबे समय से कोई हलचल की स्थिति नहीं है। जबकि दोनों ही क्षेत्रों में अभी खाली भूखंड में सीवर एवं बारिश का पानी जा रहा है। उद्योग क्षेत्र का तेजी से विस्तार हो रहा है। खाली जमीन सिमट रही हैं, जल्द ही उक्त क्षेत्रों में जलभराव की समस्या आएगी। इसको देखते हुए औद्योगिक संगठनों ने यहां पर सीवरेज प्रोजेक्ट की मांग रखी थी लेकिन संबंधित विभाग इसको लेकर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।
चौपानकी और पथरेड़ी क्षेत्र में घरों से निकलकर नालों के जरिए खाली भूखंडों में एकत्रित होने वाले प्रदूषित जल निस्तारण के लिए छह एमएलडी क्षमता के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण होना था। जुलाई 2022 में इसकी डीपीआर भी तैयार हो गई। बीडा ने इसका प्रस्ताव भी शासन को भेज दिया। दो साल बाद भी इस योजना को लेकर कोई निर्णय नहीं हो सका है। भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र में भी जलभराव बड़ा मुद्दा बना हुआ है लेकिन प्रस्तावित योजना को लेकर कोई हलचल दिखाई नहीं दे रही है।
औद्योगिक संगठनों ने इस समस्या को उठाया था क्योंकि कहरानी चौपानकी पथरेड़ी में औद्योगिक क्षेत्र होने की वजह से बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर रहते हैं। औद्योगिक क्षेत्र के बीच में स्थित गांव का भी विस्तार हो गया है। इनके सीवरेज का अभी तक कोई उचित निस्तारण नहीं है। अभी तक क्षेत्र में जो खाली जमीन हैं उन पर ही पानी का जमाव होता रहता है। खाली भूखंड में निर्माण होने पर समस्या पैदा होती जिसके निराकरण के लिए यहां एसटीपी की जरूरत थी। उक्त समस्या को देखते हुए बीडा ने यहां पर एसटीपी के निर्माण को लेकर डीपीआर तैयार कराई। डीपीआर के अनुसार प्रोजेक्ट पर करीब 10 करोड़ रुपए की लागत आनी थी।
समस्या रखी पर समाधान नहीं हुआ
उद्योग संगठन बीसीसीआई अध्यक्ष रामनारायण चौधरी ने क्षेत्र में एसटीपी निर्माण का प्रस्ताव रखा था। अधिकारियों को क्षेत्र की समस्या से अवगत कराया था। बताया था कि चौपानकी और पथरेड़ी के नालों में आसपास के गांव का पानी एकत्रित होकर आता है। दूषित पानी के शोधन के लिए अभी तक क्षेत्र में कोई इंतजाम नहीं है। भविष्य को ध्यान में रखते हुए यहां एसटीपी का निर्माण कराया जाए। दूषित पानी के शोधन के लिए दो एमएलडी क्षमता के तीन एसटीपी की जरूरत है। जिसके बाद बीडा द्वारा डीपीआर बनाकर शासन को भेजी गई है।
शासन से नहीं हो सका निर्णय
बीडा द्वारा रीको और नगर परिषद की सहभागिता के आधार पर डीपीआर शासन को भेजी गई है। डीपीआर के तहत छह एमएलएडी का एक एसटीपी या दो एमएलडी के तीन एसटीपी निर्माण का प्रस्ताव दिया गया है। जिसके निर्माण में करीब 10 करोड़ रुपए की राशि चाहिए। जमीन और फंड की व्यवस्था कैसे होगी, भविष्य में संचालन कौन करेगा। इसका प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया है। रीको के पास क्षेत्र में जमीन है, अधिकार क्षेत्र नगर परिषद और बीडा का है। बीडा के पास वहां जमीन नहीं है। जिनका पानी आ रहा है वह रीको औद्योगिक क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारी और व्यावसायिक गतिविधि वाले हैं।
उक्त क्षेत्र में जो डीपीआर बनी है, राज्य सरकार के पास लंबित है, यह पुराना मामला है, इसके बारे में संबंधित विभागों से समन्वय कर प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया जाएगा।
जीके शर्मा, यूनिट हेड, रीको