भिवाड़ी

प्लास्टिक इंडस्ट्री का युद्ध ने बिगाड़ा गणित, कच्चा माल 70 फीसदी महंगा

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मजबूरी में दस से बीस फीसदी उत्पादन कर रही फैक्टरी युद्ध की आड़ में पैकेजिंग इंडस्ट्री में हो रही मुनाफावसूली

भिवाड़ी. ईरान-अमरीका व इजरायल युद्ध का असर भिवाड़ी की प्लास्टिक और पैकेजिंग इंडस्ट्री पर देखने को मिल रहा है। प्लास्टिक उत्पाद निर्माण करने वाली इकाइयों का कच्चा माल 60 से 70 फीसदी महंगा हो चुका है। वहीं पैकेजिंग इंडस्ट्री का कच्चा माल भी दस फीसदी महंगा हो चुका है।

कच्चा माल महंगा, तैयार माल खरीदने ग्राहक नहीं
उद्यमी अरुण शर्मा ने बताया कि एलडी पैकेजिंग का उत्पादन करते हैं, इसमें प्लास्टिक दाना का उपयोग होता है। प्लास्टिक दाना रिफाइनरी से आता है। फरवरी में माल 98 रुपए प्रति किलो आया था। अब 155 रुपए किलो आया है। इस तरह कुछ दिन में ही 57 रुपए प्रति किलो की वृद्धि हो चुकी है। भाव बढऩे के बावजूद भी माल नहीं मिल रहा है। इस भाव में कच्चा माल खरीदने के बाद तैयार माल खरीदने के लिए ग्राहक नहीं है। ग्राहक को जरूरत होने पर भी बहुत कम माल खरीद रहे हैं। जो ऑर्डर पहले से मिल चुके हैं, उन्हें उसी भाव में माल देना होता है। इस तरह प्लास्टिक इंडस्ट्री की हालत नाजुक है। बाजार भी अस्थायी है। जो ट्रेडर्स हैं वह भी माल का स्टॉक कर रहे हैं। रिफाइनरी से जिस भाव में माल आ रहा है, उससे अधिक भाव में दे रहे हैं।

पैकेजिंग इंडस्ट्री दस फीसदी महंगी
उद्यमी विमल पंडित ने बताया कि पैकेजिंग इंडस्ट्री में ट्रेडर्स ने दस फीसदी भाव बढ़ा दिए हैं। ट्रेडर्स कच्चा माल महंगा दे रहे हैं, जबकि तैयार माल उसी भाव में बिक रहा है। युद्ध की आड़ में ट्रेडर्स मुनाफा वसूली कर रहे हैं। जबकि पैकेजिंग इंडस्ट्री में कच्चे माल के लिए कुछ पेपर स्क्रेप का उपयोग होता और कुछ कच्चे माल का आयात यूरोप और अरब देशों से होता है। इसकी वजह से पैकेजिंग इंडस्ट्री में कच्चे माल की उपलब्धता को लेकर कोई परेशानी नहीं है। अरब देशों से आयात बंद होने पर भी यूरोप से पूरा माल मिल सकता है लेकिन ट्रेडर्स युद्ध की आड़ लेकर भाव बढ़ा रहे हैं।

बीस फीसदी उत्पादन
उद्यमी विवेक जैन ने बताया कि रबर इंडस्ट्री में युद्ध की वजह से काफी तेजी आ चुकी है। सभी कच्चे माल महंगे हो चुके हैं। रबर, केमिकल, तेल महंगे हो चुके हैं। रबर, केमिकल और तेल दस से बीस फीसदी महंगी हो चुके है। रबर, केमिकल, तेल अरब देश और रूस से आयात होता है इसकी वजह से सीधा प्रभाव पड़ा है। एलपीजी गैस नहीं मिलने से बॉयलर नहीं चल रहे जिससे दोहरी मार पड़ रही है। सरकार कोयला लकड़ी का उपयोग नहीं करने देती। फैक्टरी दस से बीस फीसदी ही उत्पादन कर रही हैं क्योंकि मजदूर को खाली नहीं बिठा सकते और मजदूरों को हटा भी नहीं सकते। एक बार मजदूर हटने पर दोबारा नहीं मिलते।

Updated on:
13 Mar 2026 06:34 pm
Published on:
13 Mar 2026 06:34 pm