भिवाड़ी. पश्चिम एशिया में संघर्ष का असर कई स्तर पर देखने को मिल रहा है।व्यावसायिक एलपीजी का वितरण पूरी तरह से बंद है। घरेलू एलपीजी की पहले की तरह सामान्य आपूर्ति हो रही है। फैक्टरी में एलपीजी नहीं मिलने से उत्पादन बंद हो चुका है। पीएनजी की आपूर्ति भी छह महीने में औसत उपभोग का […]
भिवाड़ी. पश्चिम एशिया में संघर्ष का असर कई स्तर पर देखने को मिल रहा है।
व्यावसायिक एलपीजी का वितरण पूरी तरह से बंद है। घरेलू एलपीजी की पहले की तरह सामान्य आपूर्ति हो रही है। फैक्टरी में एलपीजी नहीं मिलने से उत्पादन बंद हो चुका है। पीएनजी की आपूर्ति भी छह महीने में औसत उपभोग का 80 प्रतिशत दी जाएगी। एनसीआर इंडेन के एमडी राजेश अग्रवाल ने बताया कि घरेलू क्षेत्र में 25 दिन बाद बुकिंग का नियम होने की वजह से उपभोक्ता पेनिक स्थिति में है, इसलिए पहले की अपेक्षा बुकिंग अधिक आ रही है। भिवाड़ी में प्रतिदिन 1500 सिलेंडर घरेलू खपत है। अभी भी उतनी ही आपूर्ति है। सभी घरेलू उपभोक्ताओं को पेनिक होने की जरूरत नहीं है। घरेलू गैस की नियमित आपूर्ति है, घबराएं नहीं। सिलेंडर खत्म होने पर या कुछ दिन पूर्व ही बुकिंग कराएं। जिनके पास एक सिलेंडर है वह 2200 रुपए में दूसरा सिलेंडर जारी करा ले। उद्यमी अंकित जैन ने बताया कि 20 फीसदी पीएनजी की कम आपूर्ति होने पर इतना ही उत्पादन कम हो जाएगा। उत्पादन कम होने पर ऑर्डर कम लेंगे, जिससे बाजार में हमारे उपभोक्ताओं से रिश्ते खराब होंगे। कर्मचारियों की संख्या कम नहीं की जा सकती, उन्हें उतना ही वेतन देना पड़ेगा क्योंकि बाद में कर्मचारी नहीं मिलते। इस तरह उत्पादन कम होगा और हमारी लागत बढ़ जाएगी।
गैस वितरण की यह स्थिति
हरियाणा सिटी गैस के वीपी अमित कुमार सैम ने बताया कि गैस आपूर्ति पर भारत सरकार ने अपना नियंत्रण कर लिया है, इसको लेकर नौ मार्च को गजट नोटिफिकेशन निकाला है। उसके तहत खपत के अनुसार सीएनजी आपूर्ति होगी। घरेलू खपत के अनुसार पीएनजी की आपूर्ति होगी। औद्योगिक और व्यावसायिक पीएनजी के लिए पिछले छह महीने का औसत उपभोग था, उसका 80 फीसदी आपूर्ति होगी। औद्योगिक और व्यावसायिक उपयोग में एलपीजी आपूर्ति को बंद कर दिया है।
डीजल भट्टी का उपयोग
मेरे पास फिलहाल तीन सिलेंडर स्टॉक में हैं उनसे काम चल रहा है। मेरे पास डीजल भट्टी थी, उसे काम लेना शुरू कर दिया है। डीजल भट्टी में डीजल और लाइट दोनों का उपयोग होता है। प्रेशर के लिए लाइट से ब्लोअर चलाना पड़ता है। जिसकी वजह से गैस की अपेक्षा डीजल भट्टी से मिठाई बनाना करीब दस फीसदी महंगा पड़ेगा।
हरिशंकर शर्मा, मिठाई विक्रेता
सरकार ने कराया ईंधन का बदलाव, अब फैक्टरी में उत्पादन बंद
पहले उत्पादन के लिए लकड़ी कोयला उपयोग करते थे, सरकार ने इसके बाद हमें ब्रेकेट(तूड़ी) पर ला दिया। ब्रेकेट उपयोग करने पर ओसीइएमएस लगाने की शर्त रख दी, इसे लगाने में छह लाख का खर्चा था, इसलिए हमने एलपीजी पर उत्पादन शुरू कर दिया। अब एलपीजी की आपूर्ति बिल्कुल बाधित है। इसकी वजह से हमारा उत्पादन बंद हो चुका है। जब तक एलपीजी नहीं मिलेगी, हमारे पास उत्पादन शुरू करने का कोई विकल्प नहीं है। उत्पादन शुरू करने एलपीजी मिलनी चाहिए, या फिर हमें लकड़ी, कोयला, डीजल उपयोग की अनुमति दी जाए। हमारा उत्पादन बंद होने से हजारों मजदूरों की रोजी रोटी पर संकट है। बैंक की किश्त नहीं दी जाएगी, इससे भी आर्थिक संकट उभरेगा।
विरल गर्ग, उद्यमी