
भोपाल। दिसम्बर 2014 के पहले से शासकीय जमीनों पर काबिज 12 हजार परिवारों को अभी तक पट्टा नहीं मिला है। इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन ने सभी नगरीय निकाय से पट्टा वितरण संबंध में जानकारी मांगी है। इसके साथ ही उन्हें एक माह के अंदर सभी पट्टे वितरण करने के लिए कहा है। विभाग ने पट्टे वितरण के लिए जगह-जगह कैंप लगाने के भी निर्देश दिए हैं।
तत्कालीन शिवराज सरकार ने शासकीय जमीन पर काबिज परिवारों को पट्टे देने की घोषणा 2016 में की थी। घोषणा के बाद सर्वे कराया गया, जिसमें 44169 परिवारों को इसके लिए पात्र पाया गया। इसमें से भाजपा सरकार ने चुनाव से पहले ही 31500 परिवारों को पट्टे बितरित कर दिए थे। कांग्रेस सरकार आने के बाद शेष परिवारों को पट्टे बितरण की प्रक्रिया अधिकारियों ने रोक दी गई।
इसकी मुख्य वजह यह थी कि भाजपा सरकार द्वारा बनाए किए पट्टा फार्मेट को बदल कर नए सिरे से फार्मेट निर्माण कराया जाना था। सरकार ने झाबुआ उप चुनाव से पहले ही सभी नगरीय निकायों को पट्टे के देने के निर्देश दिए थे, लेकिन नगरीय निकायों ने अभी तक 12 हजार परिवारों को पट्टे नहीं दिए हैं।
इस मामले में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव संजय दुबे ने सभी निकायों को दो माह के अंदर पट्टे बांटने तथा पट्टे जारी करने के संबंध में अपर कलेक्टरों से रिपोर्ट बुलाई है। अपर कलेक्टरों द्वारा पट्टे जारी करने के बाद अगर निकाय के अधिकारियों ने उसे वितरित नहीं किया है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पट्टे बितरण में तीन संभाग पीछे
पट्टे बितरण करने में ग्वालियर, उज्जैन और सागर संभाग सबसे पीछे हैं। यहां दो-दो हजार से अधिक परिवारों को अभी तक पट्टे बितरित नहीं किए गए हैं। इन संभागों के निकायों को पट्टे वितरण के लिए विशेष अभियान चलाने के लिए कहा गया है। वहीं पट्टे वितरण करने के मामले में इंदौर, होशंगाबाद और भोपाल सबसे आगे है।
617 पट्टे निरस्त
सरकार ने जांच के बाद 617 पट्टे निरस्त किए हैं। जांच में यह पाया गया है कि यह परिवार दिसम्बर 2014 के बाद शासकीय जमीन पर कब्जा किया था। इससे पहले काबिज होने के संबंध में उन्होंने न तो कोई दस्तावेज सरकार के सामने पेश कर पाए हैं और न ही इसके संबंध में शासकीय प्रमाण मिले हैं। सरकार ने जबलपुर में 114, नीमच में 404, खरगोन में 40, झाबुआ में एक, रायसेन और विदिशा13-13 और श्योपुर जिले में18 पट्टे निरस्त किए गए हैं।