कर्नाटक से आएंगे 15 हाथी, मध्यप्रदेश के तीन टाइगर रिजर्व में छोड़े जाएंगे...।
भोपाल। टाइगर स्टेट, घड़ियाल स्टेट, लेपर्ड स्टेट के बाद क्या मध्यप्रदेश अब एलिफेंट स्टेट (elephant state) बनने जा रहा है। जी हां मध्यप्रदेश में हाल ही में चीता स्टेट बनने के बाद कर्नाटक के हाथी लाए जा रहे हैं। 15 हाथियों को वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिए लाया जा रहा है। यह हाथी अगले माह तक मध्यप्रदेश के जंगलों में पहुंच जाएंगे।
मध्यप्रदेश में हाथियों का कुनबा बढ़ाने की प्लानिंग है। फारेस्ट विभाग इन हाथियों की मेजबानी की तैयारी में जुट गया है। यह 15 हाथी कर्नाटक से लाए जाएंगे। 6 हाथियों को होशंगाबाद जिले के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में भेजा जाएगा। इनमें से 9 हाथियों को पेंच और कान्हा टाइगर रिजर्वे में भेजा जाएगा। मध्यप्रदेश में बढ़ती वाइल्ड लाइफ की सुरक्षा के लिए यह तैयारी की जा रही है।
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में 6 हाथी बचे
पहले सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में 8 हाथी थे, जिनमें से कूनो नेशनल पार्क में सिद्धनाथ को और लक्ष्मी को चीतों की नगरानी करने के लिए भेजा गया था, जिसके बाद यहां छह हाथी बचे हैं। इनमें सबसे छोटा हाथी विक्रम है। सबसे बुजुर्ग हथिनी अजुंगम है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में 4 हाथी एक ही परिवार के हैं।
कर्नाटक के हाथियों के शामिल होने से होशंगाबाद जिले के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में हाथियों की संख्या बढ़कर दोगुनी हो जाएगी। वर्तमान में यहां महज 6 हाथी हैं। इसके अलावा कर्नाटक के नागरहोल टाइगर रिजर्व (मैसूर) के साथ ही तीन जगहों से पांच और हाथी लाने की चर्चा हो रही है। इसके लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं। इन हाथियों को लाने में करीब पांच लाख रुपए का खर्च भी आएगा।
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में लगातार बाघों की संख्या बढ़ रही है। यहां 54 बाघ हो गए हैं। इसेक अलावा बारहसिंगा भी काफी संख्या में हैं। इसे देखते हुए कर्नाटक से आने वाले 15 हाथियों में से 6 हाथी सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (STR) में लाए जाएंगे। यहां के क्षेत्र संचालक एल कृष्णमूर्ति की अध्यक्षता में फारेस्ट विभाग ने कमेटी बनाई थी। उसी के बाद यह संभव हो सका है।
हर साल होता है हाथी महोत्सव
कर्नाटक से आ रहे हाथियों का उपयोग सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के अलावा पेंच और कान्हा टाइगर रिजर्व में वन्यप्राणियों की सुरक्षा में किया जाएगा। हाथियों का उपयोग टाइगर रिजर्व में बाघों के रेस्क्यू और पर्यटकों को सैर कराने में भी किया जाता है। रात के वक्त पेट्रोलिंग के लिए भी हाथियों की मदद ली जाती है। हर साल सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में सात दिवसीय हाथी महोत्सव का भी आयोजडन होता है, जिसमें हाथियों के लिए विशेष पकवान बनाए जाते हैं। इसके अलावा चिकित्सा शिविर का भी आयोजन होता है।