
MP News : मध्य प्रदेश के 190 अफसरों का ओहदा बढ़ गया है। अब ये डिप्टी कलेक्टर हो गए हैं। इनमें से कुछ को ये ओहदा 7 साल पहले 2019 और कुछ को 12 साल पहले 2013 में मिल जाना था, लेकिन पदोन्नति पर ब्रेक लगता रहा और ये नीचे के पदों पर ही सेवाएं देते रहे। ये सभी राजस्व सेवा के अधिकारी है, जो अब राज्य प्रशासनिक सेवा का ग्रेड मिल गया है। सरकार द्वारा पदोन्नति शुरू करने के बाद इन्हें ये ओहदा मिला है।
पदोन्नति से डिप्टी कलेक्टर के पदों पर तैनाती के लिए राज्य में 315 पद खाली थे, लेकिन राज्य में इतने अधिकारी ही नहीं बचे। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि मई 2016 से पदोन्नति नहीं हुई, इसके कारण नीचे के पद खाली नहीं हुए। तहसीलदार और डिप्टी कलेक्टर के पद पर पदोन्नति के लिए 232 नाम रखे थे, लेकिन इनमें से 42 शासकीय सेवक ऐसे निकले, जो नियम शर्तों को पूरा नहीं कर पा रहे थे, इसलिए इन्हें आगे बढ़ने के अवसर नहीं मिले।
बता दें कि, उक्त पदों के लिए राज्य लोक सेवा आयोग के इंदौर स्थित कार्यालय में 6 जुलाई को डीपीसी हुई थी। जिसमें आयोग के चेयरमैन नरेंद्र कुमार कोष्टी समेत आयोग के सदस्य व सचिव शामिल हुए। डीपीसी के लिए 315 खाली पद रखे गए थे, लेकिन इतने राजस्व अधिकारी ही नहीं मिले।
मंत्रालय में पदोन्नति की प्रक्रिया जारी है। बीते सप्ताह 463 पदों को पदोन्नति के जरिए भरा गया है जिसमें निज सचिवों को स्टाफ ऑफिसर के पद पर और सहायक अनुभाग अधिकारियों को पदोन्नत किया गया। वहीं पदोन्नति से नीचे के पद खाली हो रहे है। ऐसे पदों पर नए सिरे से भर्तियां होंगी। एक अनुमान के मुताबिक करीब 2 लाख पद खाली होंगे, सरकार चाहेगी तो इन पर भर्ती प्रक्रिया को तेज कर सकती है।
कर्मचारी नेता अनिल बाजपेयी का कहना है कि सरकार लोक कल्याण करना चाहे तो कोई न कोई रास्ता निकाल ही सकती है। राज्य में पदोन्नति शुरू कराना, इसका सबसे बड़ा और ताजा उदाहरण है। सरकारें चाहती तो यह रास्ता पहले भी निकाला जा सकता था। यदि ऐसा होता तो बीते 10 साल में जो लाखों शासकीय सेवक बगैर पदोन्नति के सेवानिवृंा हुए, वे भी बढ़ा हुआ ओहदा पाकर स0मान से सेवानिवृंा होते। किसी भी सरकार को यह अनदेखी नहीं करनी चाहिए।