
Bhopal Master Plan मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के 65 हजार दुकानों, प्रतिष्ठानों पर सीलिंग की तलवार लटकी है। सुप्रीम कोर्ट का भी इसपर सख्त रुख है। आवासीय क्षेत्र के कमर्शियल एक्टिविटी पर 'सुप्रीम' सुनवाई के चौथे दिन भोपाल विकास योजना ड्राफ़्ट 2047 जारी कर दिया गया। इस पर सुझाव और आपत्तियां मांगी गई है। 1016.90 वर्ग किमी निवेश क्षेत्र के साथ ड्राफ़्ट में मिक्स्ड लैंडयूज को शामिल किया है। सीलिंग कार्रवाई के बीच सबसे ज्यादा इसी का इंतजार था। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएंडसीपी) ने ड्राफ़्ट में मेरठ के शास्त्री नगर में आवासीय में बनी दुकानों को नियमित करने के लिए बनाए उन बिंदुओं को भी शामिल किया है, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुका है। इस ड्राफ़्ट से भोपाल के उन हजारों व्यापारियों को फिलहाल कोई राहत नहीं मिलेगी जो सीलिंग की जद में आ चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट यह बात पहले ही स्पष्ट कर चुका है।
भोपाल में टीएंडसीपी ने आवासीय परिसरों में हुए कमर्शियल निर्माणों को नियमित करने का रास्ता खोला है। ड्राफ़्ट के अनुसार कॉलोनियों में अब 5 प्रतिशत क्षेत्रफल पर कमर्शियल भूखंड होंगे। मेट्रोपॉलिटन रीजन को देख ग्रोथ कॉरिडर की व्यवस्था की गई है।
कॉलोनियों में ग्रीन एरिया 16 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है, 18 मीटर से अधिक चौड़ी सड़क के किनारे कमर्शियल प्लॉट पर होटल-गैरेज खोल सकेंगे, कमर्शियल निर्माणों को नियमित करने का रास्ता भी खोला है।
ड्राफ़्ट में आवासीय परिसरों में विकसित कमर्शियल गतिविधि को नियमित करने के प्रावधान हैं। स्पष्ट किया कि ये प्रारूप की अधिसूचना से पहले गैर आवासीय रूप में विकसित भवनों पर लागू होगा। संपत्ति कर को कमर्शियल रेट से जमा करने व बिजली के कमर्शियल बिल को आधार बनाया है। हालांकि एमओएस को पूर्व स्थिति में लाने, अधिभोग शुल्क के साथ पार्किंग शुल्क व अन्य टैक्स जमा करने की शर्त जोड़ी गई है। निगमायुक्त को सक्षम प्राधिकारी बनाया है। इसमें कॉलोनी के आंतरिक मार्ग पर ही दुकान स्थिति होने की शर्त भी जोड़ी है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह मास्टर प्लान भोपाल की प्राकृतिक धरोहर, भोजताल, वन क्षेत्रों एवं बाघ भ्रमण क्षेत्र संरक्षण के साथ नागरिकों को बेहतर सुविधाएं, सुगम मोबिलिटी, आर्थिक विकास के अवसर उपलब्ध कराने के नजरिए से बनाया गया है।
नए मास्टर प्लान के आते ही सीलिंग रुक जाने और आवासीय क्षेत्र में व्यवसायिक काम करने की मंजूरी मिल जाने की आस लगाए बैठे दुकानदार यह बात स्पष्ट रूप से समझ लें कि ऐसा कुछ नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट साफ कह चुका है कि मास्टर प्लान उसकी मंजूरी के बाद ही लागू हो सकेगा। कोर्ट में अगली सुनवाई तक न केवल दुकानें बंद रखना होगा बल्कि इस दौरान सीलिंग में सख्ती भी हो सकती है।