MP News: विवि प्रशासन के अनुसार, इससे प्रतिभाशाली छात्रों को शोध के क्षेत्र में जल्दी अवसर मिलेगा और तकनीकी शिक्षा को नई दिशा मिलेगी।
MP News: मध्यप्रदेश में एक ही डिग्री के लिए अलग-अलग नियम लागू होने से छात्रों के बीच असमंजस की स्थिति है। आरजीपीवी ने पीएचडी ऑर्डिनेंस में बड़ा बदलाव करते हुए बीटेक के बाद सीधे पीएचडी में प्रवेश का रास्ता खोल दिया है। यानी एमटेक डिग्री अनिवार्य नहीं होगी। 75 प्रतिशत अंक लाने वाले छात्र नए सत्र 2026- 27 से सीधे पीएचडी में प्रवेश ले सकेंगे। यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के प्रावधानों के तहत किया गया है।
विवि प्रशासन के अनुसार, इससे प्रतिभाशाली छात्रों को शोध के क्षेत्र में जल्दी अवसर मिलेगा और तकनीकी शिक्षा को नई दिशा मिलेगी। वहीं दूसरी ओर (बीयू) के यूआइटी विभाग में अब भी पुरानी व्यवस्था लागू है। यहां बीई या बीटेक के बाद पीएचडी के लिए एमटेक डिग्री जरूरी है। ऑर्डिनेंस में बदलाव न होने के कारण छात्रों यह लाभ नहीं मिल पा रहा है।
आरजीपीवी ने पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में भी संशोधन किया है। अब लिखित परीक्षा को 70 प्रतिशत और साक्षात्कार को 30 प्रतिशत वेटेज दिया जाएगा। पहले लिखित परीक्षा का वेटेज 75 प्रतिशत और साक्षात्कार का 15 प्रतिशत था। जेआरएफ धारकों को लिखित परीक्षा से छूट दी गई है। उनके जेआरएफ स्कोर को ही 70 प्रतिशत वेटेज मिलेगा। इससे राष्ट्रीय स्तर पर चयनित अभ्यर्थियों को सीधा लाभ मिलेगा।
आरजीपीवी ने इस सत्र से पार्ट-टाइम पीएचडी की सुविधा भी शुरू कर दी है। यह व्यवस्था विशेष रूप से नौकरी कर रहे पेशेवरों के लिए है, ताकि वे अपनी सेवाओं के साथ शोध कार्य जारी रख सकें।
विश्वविद्यालय के एआइसीटीई कोर्स में अभी यह व्यवस्था लागू नहीं हुई है। यूजीसी के कोर्स में बदलाव किया जा चुका है। एनईपी के तहत आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जा रही है और जल्द ही यहां भी नई व्यवस्था लागू करने पर काम किया जा रहा है।- डॉ. नीरज गौर, डायरेक्टर, यूआइटी