मॉनसून सीजन में एसी चलाने से पहले ध्यान दें ये बातें....
भोपाल। बदली जीवनशैली ने लोगों को आराम पसंद बना दिया है। वे हर मामले में आराम की जिंदगी पसंद करते हैं। गर्मी के मौसम को ही लीजिए, अब लोगों की प्राथमिकता में पंखे-कूलर की बजाय एयर कंडीशनर ( Air conditioner ) आ गया है। ऑफिस हो या घर, वे चाहते हैं उनका वक्त एसी की ठंडी हवा के बीच गुजरे लेकिन गौर करने वाली बात है कि एसी सेहत के लिए नुकसानदायक है। अभी बारिश के मौसम में तो इसके और भी ज्यादा नुकसान हैं। यही वजह है कि एसी में अधिक रहने वाले सर्दी, जुकाम, खांसी, सांस संबंधी परेशानियों के अक्सर शिकार हो जाते हैं। इस मामले में अवेयर होने की जरूरत है, ताकि एसी सेहत के साथ खिलवाड़ न कर सके।
बढ़ जाते हैं बैक्टीरिया
एसी कमरों में लम्बा समय बिताने वाले लोग बार-बार बीमार पड़ते पाए गए हैं। बंद एयरकंडीशन कमरों में घूमती बासी हवा कई प्रकार की बीमारियां फैलाती है। सेंट्रल एयरकंडीशनिंग प्लांटों में नमी होती है। एसी का तापमान बैक्टीरिया पनपने के लिए आदर्श होता है। ध्यान दीजिए कि जिन एसी प्लांट्स की समय-समय पर साफ-सफाई नहीं होती, उनमें लेजियोनेला जैसे एयरबोर्न बैक्टीरिया पैदा हो जाते हैं और एसी की हवा के जरिए वे पूरे कमरे में घूमते हैं और कमरे में बैठने वाले व्यक्ति इनकी चपेट में आ जाते हैं।
मोटापे का खतरा
लम्बे समय तक एसी में बैठने वालों को मोटापा और हृदय रोगों से पीड़ित होते देखा गया है। लंबे समय तक आरामदायक स्थिति में बैठे रहने पर व्यक्ति की फिजिकल एक्टीविटी कम हो जाती है। वह खुद को आरामदायक स्थिति में पाता है और बाहर जाने या फिजिकल एक्टिविटीज में कमी आ जाती है। यही वजह है कि ऐसे शख्स मोटापा और मोटापे से जुड़ी विभिन्न तरह की बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। इसलिए ज्यादा देर एसी में न बैठें।
साइनुसाइटिस
एसी में 8-10 घंटे रहने वाले लोगों में राइनाइटिस और साइनुसाइटिस की दिक्कत काफी पाई गई है। दरअसल एसी रुम में हवा शुष्क होती है। इस वजह से म्यूकस मेम्ब्रेंस में सूजन आ जाती है। यही नहीं, एसी का माहौल कर्मचारियों के काम करने की क्षमता में भी कमी लाता है। एक ही भवन में हवा का असमान एयर फ्लो होने से भवन में हर जगह का तापमान अलग-अलग होता है। इसके चलते इससे थकान होने लगती है और काम करने वाले लोगों की गतिविधियां धीमी होने लगती है। साथ ही एसी, काम करने वाले लोगों को एनर्जेटिक के बजाय सुस्त बनाता है।
तापमान का अंतर
एसी और नॉन एसी क्षेत्रों में तापमान का अंतर सेहत के लिए नुकसानदायक होता है। इन दोनों क्षेत्रों में जितना ज्यादा अंतर होता है, उतना ही बैक्टीरियल इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है।