भोपाल

आवंटित जमीनों की होगी जांच, भू उपयोग बदला तो आवंटन होगा रद्द

ये होगा लाभ सबसे ज्यादा उद्योगों के लिए आवंटित शहरी सुविधाओं को विकसित करने आवंटन पर फोकस गोविंदपुरा- हुजूर में सबसे ज्यादा आवंटन कोट्सतय नियमों से आवंटन होता है और इसकी मॉनीटरिंग भी कराई जाती है। जो शर्तो का उल्लंघन करता है, उनका आवंटन भी रद्द होता है।

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Jul 03, 2024
  • जिले में 2000 हेक्टेयर से ज्यादा जमीनभोपाल. जिले में विभिन्न कामों के लिए आवंटित जमीनों की जिला प्रशासन जांच करेगा। एसडीएम के माध्यम से जांच में पता किया जाएगा कि जमीन को जिस काम के लिए आवंटित किया था, उसका कोई दूसरा उपयोग तो नहीं हो रहा है। प्रशासन के पास इस समय 200 से अधिक शिकायतें पहुंची है, जिसमें जमीन का अन्य उपयोग किया जा रहा है। उसके बाद ही जांच का निर्णय लिया गया। बीते सालों में प्रशासन की ओर से दो हजार हेक्टेयर से अधिक जमीन आवंटित की गई है।

ये होगा लाभ

  • जमीन आवंटन के समय भूमि उपयोग तय होता है। सरकार जमीन इसलिए आवंटित करती है ताकि सार्वजनिक व जनहित वाले क्षेत्रों से जुड़े निर्माण काम हो। आमजन व शहरवासियों को लाभ मिले। यदि जमीन आवंटित कराने के बाद उसपर अन्य उपयोग या यूं कहें कि सार्वजनिक की बजाय निजी हित वाले काम किए जाएं तो फिर आमजन को लाभ नहीं होता है। इसलिए ही उपयोग तय कराने की कोशिश है। स्कूल, कॉलेज, उद्यम को ही सुनिश्चित कराने से आमजन को लाभ होगा।

सबसे ज्यादा उद्योगों के लिए आवंटित

  • जिले में सबसे ज्यादा जमीन का आवंटन उद्योग के लिए हुआ है। करीब 1000 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन उद्योगों के लिए अलग-अलग जगह पर आवंटित है। इसके साथ ही शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों के लिए जमीन दी हुई है। प्रशासन के पास पहुंची शिकायतों के अनुसार करीब 300 हेक्टेयर जमीन पर अन्य उपयोग हो रहा है।

शहरी सुविधाओं को विकसित करने आवंटन पर फोकस

  • प्रशासन की ओर से जारी निर्देश के अनुसार शहर से डेयरी विस्थापन समेत टिंबर मार्केट- आरा मशीन, विभिन्न मंडी के साथ ही सरकारी वेयर हाउस के लिए जमीन का आवंटन किया जाए। अवैधतौर पर हो रहे कब्जों को हटाकर जमीन को ग्रीन बेल्ट में शामिल कर यहां ग्रीनरी विकसित करने का भी कहा गया है।

गोविंदपुरा- हुजूर में सबसे ज्यादा आवंटन

  • जिला प्रशासन ने जमीनों का सबसे ज्यादा आवंटन गोविंदपुरा व हुजूर विधानसभा में किया है। गोविंदपुरा में औद्योगिक क्षेत्र समेत कई शैक्षणिक संस्थाओं को जमीनें दी गई है, जबकि हुजूर में आइटी पार्क और अन्य प्रोजेक्ट के लिए जमीनें दी गई। नीलबड़-रातीबड़, कलखेड़ा में भी बड़ी शैक्षणिक संस्थाओं को जमीन है।

कोट्स
तय नियमों से आवंटन होता है और इसकी मॉनीटरिंग भी कराई जाती है। जो शर्तो का उल्लंघन करता है, उनका आवंटन भी रद्द होता है।

  • कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर
Published on:
03 Jul 2024 10:53 am
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