
chintamani malviya : एमपी के बीजेपी विधायक चिंतामणि मालवीय एक बार फिर मुखर हुए हैं। उन्होंने देश में मंदिरों की स्थिति को लेकर कई बड़े सवाल उठाए हैं। विधायक चिंतामणि मालवीय ने बाकायदा एक वीडियो जारी किया है जिसमें मंदिरों की संपत्ति और प्रबंधन को लेकर कई सुझाव भी दिए हैं। उन्होंने मंदिरों को राज्य के नियंत्रण से मुक्त करने की मांग की। विधायक चिंतामणि मालवीय ने मंदिरों की जमीन सुरक्षित रखने के लिए ओडिशा और तमिलनाडु जैसी व्यवस्था की वकालत की। उन्होंने मंदिरों की व्यवस्था के लिए सनातन बोर्ड बनाने का भी सुझाव दिया।
डॉ. चिंतामणि मालवीय आलोट से विधायक हैं। उन्होंने ‘भारतीय मंदिर संपदा : शोषण और समाधान-एक विवेचन’ शीर्षक से एक वीडियो जारी किया है। सोशल मीडिया में जारी इस वीडियो में डॉ. चिंतामणि मालवीय ने देश के मंदिरों के संबंध में अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। मंदिरों के महत्व और उनकी संपन्नता का भी जिक्र किया।
विधायक डॉ. चिंतामणि मालवीय ने कहा कि त्योहारों और अन्य धार्मिक मौकों पर दान देना हमारी संस्कृति का हिस्सा रहा है। शासकों ने तो मंदिरों को बड़ी मात्रा में दान दिया। जिससे हजारों वर्षों में कई मंदिर बेहद संपन्न बन गए। 1026 में महमूद गजनवी के हमले के समय सोमनाथ मंदिर में बड़ी मात्रा में सोना और आभूषण थे। देश के कई मंदिरों को आज भी हर साल करोड़ों रुपए का दान मिल रहा है। उनके पास बड़ी संपत्ति है।
पद्मनाभस्वामी मंदिर, शिरडी के साईं मंदिर, वैष्णो देवी, सिद्धिविनायक मंदिर, महाकाल, काशी विश्वनाथ मंदिरों का उदाहरण देते हुए विधायक चिंतामणि मालवीय ने कहा कि ऐसे अनेक बड़े मंदिरों की आय से अस्पताल, स्कूल आदि संचालित हो रहे हैं। उन्होंने मंदिरों के धन से यूनिवर्सिटी, कॉलेज, स्कूल, अस्पताल चलाने और जरूरतमंदों की सहायता करने की बात कही। इस धन से देश में बड़ी संख्या में जर्जर हो रहे छोटे मंदिरों के रखरखाव करने का सुझाव दिया।
भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय ने मंदिरों की संपत्ति, दान और जमीन के प्रबंधन में सरकारों की बढ़ती भूमिका पर सवाल उठाया। उन्होंने मंदिरों को सरकारों के सीधे नियंत्रण से मुक्त कर उनके प्रबंधन के लिए सनातन बोर्ड बनाने का प्रस्ताव रखा। विधायक चिंतामणि मालवीय ने मंदिरों की संपदा का पारदर्शी और बेहतर प्रबंधन कर शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़ा काम करने की बात कही। उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्तियों के नियमन के लिए कानून बनाए गए पर मंदिरों की संपत्ति के लिए वैसी व्यवस्था विकसित नहीं की गई।