
भोपाल. जल स्रोतों को सहेजने और उनके जीर्णोद्धार के लिए चलाए जाने वाले पत्रिका के महाअभियान अमृतं जलम् का रविवार को राजधानी में आगाज हुआ। यहां बड़ा बाग की बावड़ी में कई संगठनों और लोगों ने श्रमदान कर बावड़ी की सफाई की।
दो मंजिला भवन से मकडिय़ों के जाले और धूल हटाई गई । जाल डालकर पानी के ऊपर तैर रहे कचरे की सफाई की गई। पत्रिका का यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। इसके तहत शहर के अन्य जल स्रोतों की सफाई और उन्हें सहेजने का काम किया जाएगा।
पत्रिका द्वारा रविवार को सुबह बड़ा बाग की बावड़ी पर शुरू किए गए अमृतं जलम् महाअभियान में शहर की सामाजिक, स्वयंसेवी संस्थाओं और नागरिकों ने भाग लिया। इस दौरान सभी ने यहां श्रमदान कर बावड़ी की साफ-सफाई में अपनी भागीदारी निभाई। इसमें युवा भी शामिल थे।
कोई झाड़ू लगा रहा था तो कोई कचरा फेंक रहा था। कोई पानी की सफाई में सहयोग कर रहा था। सेवा संकल्प युवा संगठन के सदस्यों ने भी अभियान में भागीदारी निभाई। इस मौके पर संगठन के संयोजक प्रकाश मालवीय, दीपक साकरे, अंकित शर्मा, यश जैन, विवेक श्रीवास्तव, सुमित मालवीय, रमेश मालवीय आदि उपस्थित थे।
इसी प्रकार प्रांतीय कुशवाहा समाज की ओर से समाज के प्रांताध्यक्ष नारायण सिंह कुशवाहा समाज के साथियों के साथ यहां पहुंचे और बावड़ी की साफ-सफाई में सहयोग किया। सार्थक संस्था के इम्तियाज अली अपने साथियों के साथ यहां पहुंचे। कई अन्य संगठन और उनके पदाधिकारी भी मोर्चा संभाले हुए थे। बावड़ी से जो कचरा निकाला गया, उसे नगर निगम के अमले ने एकत्रित कर वहां से कचरा स्टेशन तक पहुंचाने में मदद की।
गेट लगने से बंद हुई असामाजिक तत्वों की एंट्री
पत्रिका ने वर्ष 2017 में बड़ा बाग की बावड़ी की सफाई बीड़ा उठाया था। उस समय नीचे तक जाने के रास्ते में बड़े पत्थर पड़े हुए थे, पानी भी काला था। मकड़ी के जाले लटकने के साथ धूल की परतें जमी थी। पत्रिका ने जनता के साथ मिलकर इसकी सफाई की। औकाफ-ए-शाही के सचिव मोहम्मद अजीम ने बताया कि पत्रिका द्वारा की गई सफाई के बाद बावड़ी के मुख्य द्वार पर गेट लगवा दिया है।
अवांछित तत्वों की एंट्री बंद हो गई है। ऊपर भी जाल लगवा दिया है जिससे कोई भी चीज सीधे बावड़ी के पानी में नहीं फेंक सके। पानी भी रोजाना निकाला जा रहा है, जिससे बावड़ी साफ होती रहे। जल्द ही इसके ऊपरी हिस्से में एक गेट लगवाया जाएगा ताकि अवांछित तत्व इसके अंदर नहीं जा सकें।
ऐतिहासिक है बड़ा बाग की बावड़ी
भोपाल टॉकीज चौराहे के पास बड़ा बाग स्थित बड़ा बाग की बावड़ी नवाबी दौर की स्थापत्य कला का नायाब नमूना है। इसका निर्माण भोपाल की 8वीं नवाब गौहर बेगम कुदसिया (1819-1937) ने कराया था। करीब 30 एकड़ में फैले बड़ा बाग में लाल पत्थरों से बनी तीन मंजिला बावड़ी देख-रेख के अभाव में सौंदर्य खो रही है। इसी के पास कई मकबरे हैं। कभी बावड़ी का पानी इतना साफ था कि लोग पीने के लिए इस्तेमाल करते थे।