
Jansangh : 21 अक्टूबर को भारतीय जनसंघ का 75 वां स्थापना दिवस मनाया जा रहा है। यह वर्तमान बीजेपी का पूर्ववर्ती दल था। इस मौके पर आयोजित कार्यक्रम को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने संबोधित किया। उन्होंने जनसंघ के तत्कालीन प्रमुख नेताओं के संघर्ष को भी रेखांकित किया। जनसंघ के विस्तार में मध्यप्रदेश के अनेक नेताओं ने अहम योगदान दिया। अटल बिहारी वाजपेई और कुशाभाउ ठाकरे इनमें सर्वप्रमुख थे। अटल बिहारी वाजपेई तो जनसंघ के अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने देशभर में घूमकर लोगों को इससे जोड़ा। तब अटल बिहारी वाजपेई अपने साथ केवल दो जोड़ी धोती कुर्ता ही रखते थे। गंदे हो जाने पर अपने साथी नेताओं के कपड़े भी पहन लेते थे।
कुशाभाऊ ठाकरे मध्यप्रदेश में संगठन के प्रमुख स्तंभ रहे। उन्होंने पहले जनसंघ और बाद में बीजेपी के विस्तार के लिए राज्य में लंबे समय तक काम किया। कुशाभाउ ठाकरे मूलत: आरएसएस के थे। इस नाते उन्होंने संघ की भी पहुंच बढ़ाई।
मालवा निमाड इलाके में जनसंघ के विस्तार में वीरेन्द्र कुमार सखलेचा का अहम योगदान रहा। प्रदेश के प्रमुख नेता के रूप में काम करने के कारण बाद में वे मुख्यमंत्री भी बने। वीरेंद्र कुमार सखलेचा ने विधानसभा में नेता विपक्ष का दायित्व भी संभाला। वे इस पद पर लंबे समय तक रहे।
बेहद शांत और सरल स्वभाव के कैलाश जोशी प्रदेश में जनसंघ के प्रमुख नेताओं में गिने जाते थे। उन्होंने विशेष रूप से प्रदेश के मध्य क्षेत्र, राजधानी भोपाल और आसपास के इलाकों में पैठ बनाई। कैलाश जोशी भी बाद में बीजेपी से मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने।
प्यारेलाल खंडेलवाल ने राज्य में पहले जनसंघ और बाद में भाजपा के विस्तार में बड़ा योगदान दिया। उन्होंने पूरे मध्य प्रदेश में पार्टी का संगठन खड़ा करने के लिए अथक मेहनत की।
जनसंघ के लिए ग्वालियर राजघराने की राजमाता विजयाराजे सिंधिया के योगदान को कोई नहीं भुला सकता। वे पहले कांग्रेस में थीं लेकिन बाद में भगवा दल की प्रमुख संवाहक बन गईं। राजमाता सिंधिया ने जनसंघ और बीजेपी के लिए खूब फंड मुहैया कराया। यहां तक कि अपनी कई बहुमूल्य संपत्तियां भी दान कर दीं।
जनसंघ के लिए अटल बिहारी वाजपेयी ने तो मानो पूरा जीवन ही समर्पित कर दिया था। उन्होंने इसे जन-जन तक पहुंचाया। अटल बिहारी वाजपेई सन 1968 से 1972 तक जनसंघ के अध्यक्ष रहे। मध्यप्रदेश के ग्वालियर-चंबल और मालवा क्षेत्र में खासी पैठ बनाई।
अध्यक्ष के रूप में जनसंघ के विस्तार के लिए अटल बिहारी वाजपेई लगातार दौरा करते रहते थे। 1969 में एक बार जब वे अलीगढ़ आए तो अपने दोस्त कमल लाल गुप्ता का कुर्ता पहनकर जनसभा को संबोधित किया। उनके धोती कुर्ता गंदे हो गए थे जिसके कारण गुप्ता से उनका कुर्ता उधार मांगा।