घर-घर विराजेंगे ‘GREEN GANESHA’, शहर रहेगा क्लीन

न्यू मार्केट स्थित कम्युनिटी हॉल में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से ईको फ्रेंडली प्रतिमा बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। इसका शुभारंभ एनजीटी के ज्यूडिशियल मेंबर जस्टिस दलीप सिंह ने किया।

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Jul 23, 2016
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भोपाल। आस्था के साथ-साथ पर्यावरण और जलस्त्रोतों की रक्षा भी हम सबका दायित्व है। गणेश उत्सव के लिए प्रतिमाएं बनाने का सिलसिला शुरू हो गया है। हर साल शहर के तालाबों में लगभग 20 हजार गणेश प्रतिमाएं और करीब 5 हजार दुर्गा प्रतिमाएं विसर्जित की जाती हैं।

एेसे में कहीं न कहीं तालाबों के साथ-साथ जलीय जीवों के अस्तित्व पर भी संकट मंडराता है। इस बार हम संकल्प लें कि अपने घरों में पर्यावरण के अनुकूल 'ग्रीन' गणेश की स्थापना करेंगे और तालाब और पर्यावरण की रक्षा करेंगे। पत्रिका पिछले कई साल से मुहिम चला रहा है, और इससे प्रेरित लोग ईको फ्रेंडली प्रतिमाएं स्थापित कर रहे हैं।

न्यू मार्केट स्थित कम्युनिटी हॉल में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से ईको फ्रेंडली प्रतिमा बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। इसका शुभारंभ एनजीटी के ज्यूडिशियल मेंबर जस्टिस दलीप सिंह ने किया।


पर्यावरण को हो रहा नुकसान

हर साल तालाब में 20 हजार से अधिक गणेश प्रतिमाओं का होता है विसर्जन पानी में मिलते हैं हजारों किलो रासायनिक रंग कई क्विंटल गाद हो जाती है जमा, पीओपी पानी में नहीं घुलता रासायनिक रंगों के कारण कई जलीय जीवों की मृत्यु होती है।


एेसे बना सकते हैं ईको फ्रेंडली प्रतिमा

मूर्तिकार अशोक भारद्वाज ने बताया कि चॉक पाउडर, कागज और गोंद से पेस्ट बनाया जाता है। इसे आटे की तरह मिला लेते हैं और फिर चित्र के हिसाब से प्रतिमा तैयार की जाती है। इस पर कलर करने के लिए हल्दी, मेहंदी, चायपत्ती, चुकंदर, हरी सब्जी, गेरू आदि का इस्तेमाल होता है।

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सजावट के लिए दालों का इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर इन प्रतिमाओं का विसर्जन होता है तो इसमें लगी दाल आदि जीवों के लिए आहार बन जाती है। इसी तरह वाटर कलर के कारण जलस्त्रोत भी सुरक्षित रहते हैं।


जलस्रोतों को बचाना जरूरी

पर्यावरणविद् केएस तिवारी का कहना है कि प्रतिमा विसर्जन के कारण पानी में प्रदूषण तेजी से बढ़ता है। प्रतिमाओं में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक रंग जलस्त्रोत, जलीय जीवों के साथ-साथ मानव जीवन के लिए भी हानिकारक हैं, ये पानी पीने योग्न नहीं होता, क्योकि इन रंगों में हेवी मेटल्स, लैड, मरकरी, जिंक आदि होता है। प्रतिमा विसर्जन मोहल्लों में कुंड बनाकर करना चाहिए।
Published on:
23 Jul 2016 11:49 am
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