
भोपाल. भारतीय किसान संघ ने 8 सिंतबर को केंद्र के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। इस एक दिवसीय आंदोलन में देशभर के किसानों के साथ साथ मध्य प्रदेश के किसानों ने भी आंदोलन में शामिल होने का ऐलान किया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश के हर जिले से किसान इस आंदोलन में शामिल होंगे। बता दें कि, फसलों के लाभकारी मूल्यों को लेकर भारतीय किसान संघ की ओर से एक दिसवीय देशव्यापी आंदोलन बुलाया है।
आंदोलन के जरिये भारतीय किसान संघ केंन्द्र सरकार से मांग करेगा कि, उसे न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं, बल्कि लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य दिया जाए। इस संबंध में क्षेत्रीय संगठन मंत्री महेश चौधरी ने कहा कि, ये आंदोलन देशभर में किया डाएगा। इस एक दिवसीय आंदोलन के जरिये किसानों द्वारा आगे की रणनीति भी तय की जाएगी। उन्होंने बताया कि, इस आंदोलन के तहत देशभर की तरह मध्य प्रदेश के सभी किसान अपने अपने जिले में धरना प्रदर्शन तो करेंगे ही, साथ ही रैली निकालकर कलेक्टर को पीएम मोदी के नाम ज्ञापन भी सौंपेंगे।
दो दिवसीय मंथन के बाद सर्वसम्मति से लिया गया फैसला
क्षेत्रीय संगठन मंत्री महेश चौधरी के अनुसार, भारतीय किसान संघ की प्रबंध समिति की बैठक दिल्ली-हरियाणा सीमा पर हुई है। इस बैठक में अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य, 36 प्रांतों के अध्यक्ष, महामंत्री, संगठन मंत्री और कोषाध्यक्ष शामिल हुए थे। दो दिवसीय मंथन के बाद सर्वसम्मति से इसपर फैसला हुआ कि, किसानों को उनकी उपज का मूल्य न मिलने की वजह से दिन ब दिन देश के किसान पर गरीबी और कर्जा बढ़ता जा रहा है। उनके बच्चों का भविष्य अंधकार में जा रहा है, तो वहीं उनका का जीवन नर्क बनता जा रहा है।
31 अगस्त तक था अल्टीमेटम
भारतीय किसान संघ की कार्यकारिणी की तरफ से बीते 11 अगस्त को केंद्र सरकार को ज्ञापन सौंपा था। इस ज्ञापन में सरकार को 31 अगस्त तक उनकी मांगों को पूरा करने के लिए कहा गया था। लेकिन, सरकार की ओर से अब तक उनकी मांगों पर किसी तरह की द़ष्टि नहीम डाली गई, इसी के तहत अब भारतीय किसान संघ की ओर से 8 सितंबर को देशभर के जिला केंद्रों पर एक दिन के धरने के साथ भारतीय किसान संघ देशव्यापी आंदोलन करने जा रहा है। किसान संघ का कहना है कि, इस प्रदर्शन की जिम्मेदारी सरकार की होगी।
लाभकारी मूल्य की मांग
किसान संघ की ओर से कहा गया है कि, सरकार सिर्फ कुछ फसलों का समर्थन मूल्य निर्धारित करके अपने दायित्वों से कैसे बच सकती है। समर्थन मूल्य मात्र छलावा है। किसानों को बाजार के भरोसे नहीं छोड़े बल्कि उसकी उपज के मूल्यों पर सरकार नियंत्रण रखें। भारतीय किसान संघ द्वारा केंद्र सरकार से मांग की जा रही है कि, किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं, बल्कि लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य देने की स्वीकृति देनी होगी। एक बार घोषित मूल के बाद महंगाई समेत अन्य वास्तविक मूल उसमें अंकित नहीं रहते।
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