
Bhopal Air : राजधानी की हवा में घुलती धूल और धुएं ने प्रदूषण का स्तर बढ़ा दिया है। शुक्रवार को भोपाल का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (एकयूआइ) 207 दर्ज किया गया। इसके साथ ही शहर देश के उन 38 शहरों में शामिल हो गया, जहां हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंच गई है। कचरा जलने से भी हवा प्रदूषित हो रही है। प्लास्टिक के जलने से निकलने वाले जहरीले केमिकल फेफड़ों को बुरी तरह नुकसान पहुंचा रहे हैं। दूसरी तरफ सड़ते कचरे से संक्रमण और बीमारियों का जोखिम बढ़ रहा है। प्रदूषण से बदहाल होते भोपाल की स्थिति को अब सुप्रीम कोर्ट में भी उठाया जाएगा।
शहर के अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण का स्तर भी अलग-अलग रहा। पर्यावरण परिसर में एकयूआइ 277 तक पहुंच गया, जबकि ईदगाह हिल्स और टीटी नगर में यह 152 दर्ज किया गया। शहर में जगह-जगह चल रहे सड़क निर्माण और खुदाई के काम से उड़ती धूल हवा को प्रदूषित कर रही है। निर्माण स्थलों पर न तो नियमित पानी का छिड़काव हो रहा है और न ही धूल रोकने के लिए ग्रीन नेट लगाई जा रही है। सड़कों पर नियमित झाड़ू नहीं लगने से वाहनों के गुजरते ही धूल के गुबार उठ रहे हैं। दूसरी ओर आसपास के क्षेत्रों में पराली जलाने और दीपावली पर पटाखों के इस्तेमाल से निकलने वाला धुआं भी हवा की गुणवत्ता पर असर डाल रहा है।
देश के 38 शहरों में एक्यूआइ 201 से 296 के बीच दर्ज किया गया। बागपत 296 एक्यूआइ के साथ सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहा। खुर्जा में 280, पारादीप में 274, अंबाला और सोनीपत में 270, मेरठ में 265 और गाजियाबाद में 257 एकयूआइ दर्ज किया गया। मध्यप्रदेश में मंडीदीप का एक्यूआई 249 और ग्वालियर का 247 रहा। भोपाल में 207, जबकि पटियाला में 201 एक्यूआइ दर्ज किया गया।
डॉक्टरों के मुताबिक प्लास्टिक के जलने से जहरीले केमिकल निकलते हैं जो फेफड़ों को खासा नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके धुएं से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ जाते हैं। चौक बाजार में कचरा जलाया जा रहा है तो इतवारा-बुधवारा में मछली और मीट के सड़ते अवशेषों से बदबू के साथ बीमारियां भी फैल रहीं है। पर्यावरणविद् सुभाष सी. पांडे ने 17 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में भोपाल के हालातों की रिपोर्ट पेश करेंगे।