गैंगरेप मामले में पीडि़ता की मां ने कहा कि उसकी बेटी को दरिंदों ने जान से मारने की कोशिश की थी, लेकिन एसआईटी ने अब तक धारा नहीं लगाई।
भोपाल। गैंगरेप मामले में पीडि़ता की मां ने एसआईटी पर जानबूझकर केस कमजोर करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि उसकी बेटी को दरिंदों ने जान से मारने की कोशिश की थी, लेकिन एसआईटी ने अब तक धारा नहीं लगाई।
वहीं, पुलिस ने केस के लिए जरूरी साक्ष्य भी नहीं जुटाए हैं। पुलिस केस को कमजोर करने के लिए अब भी कई तरह के हथकंडे अपना रही है। मालूम हो कि 31 अक्टूबर की रात हबीबगंज रेलवे स्टेशन के पास आरपीएफ थाने से 100 कदम की दूरी पर कोचिंग से लौट रही 19 वर्षीय छात्रा से चार दरिंदों ने गैंगरेप किया था।
इधर, कोचिंग क्लासेज को लेकर स्कूल शिक्षा राज्यमंत्री दीपक जोशी के बयान को पीडि़ता की मां ने तुगलकी फरमान बताया है। पीडि़ता की मां ने कहा कि कोचिंग में लड़की ही नहीं लड़के भी पढ़ते हैं। एक तरफ सरकार लड़कियों को बराबरी का दर्जा देने की बात कह रही है, वहीं मंत्री इस तरह का बयान देकर लड़कियों में डर पैदा कर रहे हैं। पीडि़ता की मां ने मंत्री को सलाह दी कि सरकार को रात ८ बजे के बाद शहर की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए।
पीडि़ता को आश्वासन और दर्द ही मिला
नौ दिन बाद भी पीडि़त छात्रा को सरकार, पुलिस की तरफ से मदद के तमाम आश्वासन ही मिले। पीडि़ता ने बताया कि घटना के बाद तमाम नेता अफसरों ने उसके घर पहुंचकर दर्द को बढ़ाया। बार-बार लोग सहानुभूति जताने उससे घटना के बारे में पूछते रहे। इससे उसकी पहचान भी उजागर हुई। धीरे-धीरे यह बात पूरे कॉलोनी के लोगों को पता हो गई। पीडि़ता ने बताया कि अब तक उसे सरकार की तरफ से न तो कोई मेडिकल सुविधा मिली, न ही कोई आर्थिक मदद।
महिलाओं ने प्रकट किया रोष
गैंगरेप को लेकर एमपी नगर में अर्पिता सामाजिक संस्था के बैनर तले महिलाओं ने बैठक कर रोष प्रकट किया। बैठक में कानून, राजनीति और समाज का वर्तमान परिदृश्य में महिला सुरक्षा को लेकर नजरिया बदलने की जरूरत पर बल दिया गया। इस मौके पर क्षत्रिय महासभा राजपूत समाज समिति की जिलाध्यक्ष क्रांति सिंह, महामंत्री प्रतिभा सिंह, पूजा सिंह राणा, सुमन सेंगर, वीणा सिंह, बार एसोसिएशन की उपाध्यक्ष एडवोकेट सपना चौधरी, डीएसपी लक्ष्मी कुशवाह, प्रतिभा मुखर्जी, अदाकारा मीनू सिंह भदौरिया, करणी सेना की सुमन स्वराज, रेणु राजपूत, सीमा सिंह, इला द्विवेदी, सिंगर सुरेखा कामले, पूजा श्रीवास्तव आदि महिलाओं ने विचार रखे।