Cancer- पीड़ितों को जहां किडनी फेलियर जैसी दिक्कतों से जूझना पड़ रहा है वहीं कैंसर भी साए की तरह उनका पीछा कर रहा है।
Cancer- विश्व कैंसर दिवस पर सामने आए कुछ आंकड़ों ने भोपालवासियों को दहला दिया है। राजधानी में कैंसर का खतरा अन्य जगहों की तुलना में ज्यादा है। यह खौफनाक रोग भोपाल के गैस पीड़ितों को लील रहा है। एक सर्वे में यह तथ्य उजागर हुआ। सम्भावना ट्रस्ट क्लीनिक के इस सर्वे में बताया गया कि भोपाल में गैस पीड़ितों Bhopal Gas Tragedy Victims में कैंसर का खतरा 13 गुना ज्यादा है। इनमें खासतौर पर फेफड़े और गले के कैंसर के केस सबसे ज़्यादा हैं। गैस त्रासदी के 40 साल बाद भी पीड़ितों के जख्म भर नहीं रहे हैं। गंभीर बीमारियां उनका पीछा नहीं छोड़ रही हैं। गैस पीड़ितों को जहां किडनी फेलियर जैसी दिक्कतों से जूझना पड़ रहा है वहीं कैंसर भी साए की तरह उनका पीछा कर रहा है।
सम्भावना ट्रस्ट क्लीनिक ने विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर पत्रकार वार्ता बुलाई। यहां अपने सर्वे के आंकड़े जारी किए।
ट्रस्ट के सर्वे के अनुसार गैस त्रासदी से प्रभावित आबादी या इलाके में कैंसर की दर, इससे अप्रभावित लोगों या इलाके की तुलना में करीब 13 गुना ज्यादा पाई गई है।
सर्वे के संबंध में सम्भावना ट्रस्ट की फरहत जहां ने विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के आसपास फेफड़ों के संक्रमण व किडनी फेलियर जैसे मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। फरहत जहां के मुताबिक सर्वे में गैस पीड़ितों की जानकारी फैक्ट्री से 3 किलोमीटर के दायरे में आने वाले जयप्रकाश नगर, कैंची छोला, काज़ी कैंप आदि इलाकों से जुटाई गई। फैक्ट्री से करीब 8 किलोमीटर दूर स्थित अन्ना नगर, भीम नगर और वल्लभ नगर से गैस त्रासदी से अप्रभावित लोगों और इलाकों के आंकड़े जुटाए।
सम्भावना ट्रस्ट के सर्वे के अनुसार भोपाल में गैस पीड़ितों Bhopal Gas Tragedy Victims में कैंसर की दर प्रति एक लाख पर 1569.84 पाई गई। जबकि गैस त्रासदी से अप्रभावितों में यह दर केवल 117.52 प्रति एक लाख है। गैस पीड़ित पुरुषों में कैंसर की दर 14.92 गुना ज्यादा है वहीं गैस पीड़ित महिलाओं में यह दर 12.22 गुना अधिक पाई गई है।
ट्रस्ट की सर्वे टीम के राधेलाल नापित ने बताया कि गैस प्रभावितों में खून के कैंसर की दर अप्रभावितों से 21.6 गुना अधिक है। इसी तरह फेफड़े के कैंसर की दर 28.78 गुना और गले के कैंसर की दर 33.86 गुना ज्यादा पाई गई है। सर्वे में 21276 गैस पीड़ित शामिल थे। 1992 से 2012 के बीच के कैंसर प्रभावितों को सर्वे में शामिल किया गया। मेडिकल रिकार्ड का गहराई से सत्यापन करने के बाद ही इन्हें सर्वे में जोड़ा गया।