
Datia Result- दतिया उपचुनाव के नतीजों ने भाजपा को अंदर से डरा दिया है। कांग्रेस ने यहां विधानसभा चुनाव में भी जीत हासिल की थी पर बीजेपी को उपचुनाव की हार ज्यादा चुभ रही है। पार्टी में टिकट को लेकर पनपे असंतोष से लेकर गुटबाजी और भितरघात जैसे बड़े कारण सामने आ चुके हैं। इसके अलावा कांग्रेस की जीत ने बीजेपी के चुनावी प्रबंधन और बड़े नेताओं की सभाओं के असर पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। दतिया में कुशवाहा समाज के वोटर्स पर पार्टी का फोकस था पर यह लाभकारी साबित नहीं हुआ। क्षत्रिय और एससी वोटर्स को लुभाने में भी बीजेपी पूरी तरह विफल रही।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि दतिया में जातिगत फैक्टर भाजपा के ज्यादा पक्ष में नहीं थे। ब्राह्मण वोटर्स भी एकजुट नहीं होने से पार्टी को नुकसान पहुंचा। जबकि भाजपा का उम्मीदवार ब्राह्मण होने से संगठन ने काफी उम्मीदें लगा रखी थीं।
ग्वालियर सांसद भारत सिंह कुशवाह को दतिया विधानसभा के 36 हजार वोटरों को साधने की जिम्मेदारी दी थी। सांसद ने भी कई सभाएं कीं, शहर और गांव में जहां कुशवाह वोटर थे वहां पूरा जोर लगाया, लेकिन कुशवाह वोटर भाजपा के पक्ष में कम ही गया।
भाजपा की ओर से दतिया में बाहरी नेताओं ने ज्यादा प्रचार किया, जबकि लोकल नेता भीड़ का हिस्सा तो बने लेकिन साथ नहीं दिखे। इस कारण जातिगत समीकरण साधने में भी भाजपा पीछे रह गई।
वहीं पूरे चुनाव में ओबीसी और एससी वोट निर्णायक माने जा रहे हैं। दतिया विधानसभा में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अनुसूचित जाति (एससी) के मतदाता बड़ी संख्या में हैं। कांग्रेस ने इन वर्गों में अपनी पैठ बनाए रखी, जबकि भाजपा अपेक्षित बढ़त नहीं बना सकी। यही वर्ग जीत- हार के अंतर को प्रभावित करने वाले माने जा रहे हैं।
पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद भाजपा के भीतर असंतोष की चर्चा रही। उनके समर्थक भी नाराज रहे।
विधानसभा उपचुनाव के परिणाम आने के बाद बीजेपी नेताओं ने मंथन करने की बात कही है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि जनादेश को हम पूरी तरह स्वीकार करते हैं। बीजेपी इन परिणामों की समीक्षा करेगी और आवश्यक रणनीति बनाएगी। उन्होंने अनुशासन तोडऩे वालों पर सख्त कार्रवाई की भी बात कही।