mp election 2023- 5 बार सांसद और मध्यप्रदेश में मंत्री भी रह चुके हैं सरताज सिंह...।
मध्यप्रदेश में चुनाव से पहले भाजपा पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा सरकार के कद्दावर नेता सरताज सिंह (sartaj singh) का 83 वर्ष की आयु में निधन हो गया। बुधवार-गुरुवार रात को उन्होंने अंतिम सांस ली। सरताज सिंह अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं और काफी समय तक मध्यप्रदेश में मंत्री रह चुके हैं। सरताज सिंह के निधन पर कई भाजपा नेताओं ने शोक व्यक्त किया है।
मध्यप्रदेश के कद्दावर नेता सरताज सिंह का 83 वर्ष की आयु में निधन हो गया। भोपाल में उन्होंने अंतिम सांस ली। वे काफी समय से बीमार चल रहे थे। सरताज सिंह के निधन पर भाजपा के दिग्गज नेताओं ने शोक व्यक्त किया है। सरताज सिंह 5 बार सांसद, दो बार विधायक रह चुके हैं और मध्यप्रदेश में पीडब्ल्यूडी और वन मंत्री भी रह चुके हैं। सरताज सिंह के निधन के बाद भाजपा के कई नेताओं ने शोक संदेश दिया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा, भाजपा संगठन मंत्री हितानंद शर्मा सहित कांग्रेस नेताओं ने भी ट्वीट कर दुख व्यक्त किया है।
2008 में सरताज सिंह ने कांग्रेस के गढ़ सिवनी मालवा को ध्वस्त कर चर्चाओं में आ गए थे। तब विधानसभा के उपाध्यक्ष रहे हजारीलाल रघुवंशी को हराया था। इसके बाद भाजपा सरकार में सरताज सिंह मंत्री भी बने। 2013 में जीतकर फिर मंत्री बनाए गए।
2016 में उनकी उम्र 75 पार हो गई थी, इसके चलते भाजपा के नए फार्मूले का हवाला देते हुए उनसे इस्तीफा ले लिया था। इसके बाद से वे लगातार पार्टी और नेतृत्व से नाराज चल रहे थे। हालांकि अमित शाह ने अपने भोपाल दौरे के वक्त मंत्री पद के लिए 75 का फार्मूला नहीं होने की बात कही थी। इसके बाद सरताज सिंह मुखर हो गए और सिवनी मालवा से चुनाव लड़ने की तैयारी में जुट गए। काफी कोशिशों के बाद भी उन्हें बीजेपी ने टिकट नहीं दिया तो कांग्रेस में शामिल हो गए और होशंगाबाद सीट से प्रत्याशी बनाए गए।
पार्टी ने कर दिया था किनारे
सरताज सिंह उस समय सुर्खियों में आए जब वे पार्टी से किनारे चल रहे थे और अचानक संन्यास लेने का ऐलान कर दिया। सरताज सिंह ने कहा था कि कुछ लोग मुझे कई सालों से हटाना चाहते हैं। मुझे मिटाने में लगे हुए हैं। सरताज सिंह ने कहा है कि इस समय पार्टी में घुटन महसूस हो रही है। भाजपा में माहौल ठीक नहीं रह गया है। इसलिए उन्होंने चुनावी राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया। इसके बाद वे काग्रेस में शामिल हो गए और चुनाव भी लड़ा। लेकिन, हार गए थे। इसके बाद 2020 में वे वापस भाजपा में आ गए थे। उम्र दराज होने के कारण पार्टी में ऐसे ही कई नेता किनारे कर दिए गए थे।
राजनीतिक करियर
2004
सरताज सिंह ने लोकसभा चुनाव में फिर से जीत हासिल की।
1998
सरताज ने लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार अर्जुन सिंह को हराया।
1989
सरताज ने होशंगाबाद से लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार रामेश्वर नीखरा को लगातार 3 बार हराया।
1978
सरताज सिंह इटारसी नगर पालिका के अध्यक्ष बने।
1975
सरताज सिंह इटारसी नगर पालिका में एल्डरमैन के रूप में चुने गए।
1971
सरताज सिंह 6 महीने से नगरपालिका परिषद के अध्यक्ष पद पर कार्यरत थे।