मध्यप्रदेश के मंत्री संजय पाठक की भूमिका पर सवाल खड़े करने वाले प्रदेश के पूर्व मंत्री अजय विश्नोई, सांसद प्रहलाद पटेल और रघुनंदन शर्मा के बाद एक और नेता ने मोर्चा खोला है। लघु उद्योग निगम के पूर्व अध्यक्ष विपिन दीक्षित ने सोशल मीडिया पर एसपी गौरव तिवारी के तबादले व पाठक पर भी टिप्पणी की है। भाजपा के सक्रिय सदस्य दीक्षित उमा भारती के खास समर्थकों में से रहे हैं।
शरद जोशी जी यूं ही नहीं कह गए हैं...हम भ्रष्टन के, भ्रष्ट हमारे। भ्रष्टाचार तो अजर-अमर है। नोटबंदी भी क्या खाक उसे खत्म कर पाएगी। कटनी की जनता टाइम खोटी कर रही है, जो एसपी गौरव तिवारी के तबादले के विरोध में सड़क पर प्रदर्शन करने उतर आई। इतिहास गवाह है गौरव तिवारी जैसे दबंग अफसरों की नियति तबादले और प्रताडऩा रही है। न खाऊंगा, न खाने दूंगा से लेकर जीरो टॉलरेंस भ्रष्टाचार की बातें चुनावी नारों और दावों में ही अच्छी लगती हैं। 500 करोड़ रुपए के हवाला कांड में संजय पाठक खुद को नर्मदा की तरह पवित्र बता रहे हैं। यह बात अलग है कि वे देश के पांचवें सबसे अमीर मंत्री हैं। उनके पास 141 करोड़ रुपए की सम्पत्ति बताई जाती है। अब ऐसे योग्य कारोबारी का साथ शिवराज सरकार कैसे छोड़ सकती है। हम पाठक के और पाठक हमारे की तर्ज पर ऐसे तमाम संजय पाठक हमारे राजनीतिक दलों की अनिवार्यता बन चुके हैं। इनके आड़े आने वाले गौरव तिवारियों का हश्र यही होता रहा है। कल्पना कीजिए कि गौरव तिवारी को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने इस तरह हटाया होता तो भाजपा किस तरह छाती-माथा कूटती। इस तरह का रुदन दिल्ली के अलावा उप्र और बिहार में भी देखने को मिलता।
मोदी तबादला निरस्त करवाएं
एसपी को हटाने पर कटनी की जनता में भड़के आक्रोश की जानकारी प्रधानमंत्री तक ट्वीटर के जरिए पहुंच चुकी है। अब अगर मोदी वाकई ईमानदार और पारदर्शी शासन के जो दावे अपनी जनसभाओं में करते हैं, उस पर अमल करते हुए अपनी पार्टी की सरकार से पूछताछ करें। तिवारी का तबादला निरस्त करने का आदेश भी अपने मुख्यमंत्री को दें। डीजीपी का रटा-रटाया जवाब है कि तबादला एक रूटीन प्रक्रिया है। लिहाजा कटनी के साथ-साथ देश-प्रदेश की जनता को रुटीन फैसलों की आदत डाल लेना चाहिए। राजनीति को गौरव तिवारी की नहीं, संजय पाठकों की जरूरत ज्यादा है।