
Corporate Style Dowry Harassment (AI Image)
Corporate Style Dowry Harassment: अब यह धारणा दरकने लगी है नई पीढ़ी दहेज, पितृसत्ता और महिलाओं के प्रति भेदभाव जैसी सामाजिक बुराइयों से मुक्त हो चुकी है। ट्विशा जैसे मामलों ने दिखाया है कि पढ़े-लिखे, आर्थिक रूप से सम्पन्न और खुद को प्रोग्रेसिव बताने वाले परिवारों में भी महिला विरोधी सोच कई रूपों में मौजूद है। फर्क इतना है कि अब इसका चेहरा बदल गया है। दहेज खुले तौर पर नहीं मांगा जाता, बल्कि आलीशान शादी, महंगे उपहार, कार, स्टेटस, सामाजिक प्रतिष्ठा और पारिवारिक अपेक्षाओं के रूप में सामने आता है।
शादी के बाद बहू से आर्थिक योगदान, करियर और घर की दोहरी जिम्मेदारी निभाने की उम्मीद की जाती है, लेकिन बराबरी, स्वतंत्र निर्णय या असहमति को आसानी से स्वीकार नहीं किया जाता। समाजशास्त्रियों का कहना है कि नई पीढ़ी में प्रताडऩा के तरीके भी बदल गए हैं। गाली-गलौज और प्रत्यक्ष हिंसा की जगह अब ताने, भावनात्मक दबाव, आर्थिक नियंत्रण और मानसिक उत्पीडऩ ने ले ली है। सच्चाई यह है कि ‘पितृसत्ता’ मरी नहीं है, बल्कि अमीर, संभ्रांत और रसूखदार युवा पीढ़ी के बीच इसने अपना 'ड्रेस कोड' बदल लिया है।
एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर साल औसतन 7,000 से अधिक दहेज हत्याएं/संदिग्ध मौतें दर्ज होती हैं। यानी हर दिन करीब 19 से 20 लड़कियां दम तोड़ रही हैं।
विश्व बैंक के अनुसार, भारत में कुछ दशक में शादियों में वित्तीय लेन-देन में बड़ी गिरावट नहीं आई। शिक्षा बढ़ने के बावजूद अमीर परिवारों में छिपा हुआ लेन-देन बढ़ा है।
द लांसेट के मुताबिक, भारत में 15 से 49 वर्ष की महिलाओं में आत्महत्या की दर वैश्विक औसत से तीन गुना अधिक है, जिसका बड़ा कारण वैवाहिक कलह, घरेलू हिंसा है।
जिम्मेदारी से बचना: यदि लडक़ा शादी तय होते समय कहे कि मुझे कुछ नहीं चाहिए, पर मेरे माता-पिता की इच्छा के अनुरूप शादी हो, तो सतर्क हो जाएं।
आजादी पर कटाक्ष: यदि वह बातों-बातों में महिला अधिकारों के कानूनों को पक्षपाती बताता है या कामकाजी महिलाओं की स्वतंत्रता का मजाक उड़ाता है, तो उसका प्रोग्रेसिव चोला नकली है।
घर का माहौल परखें: शादी से पहले केवल लडक़े का पैकेज न देखें। यह देखें कि वह अपनी मां या बहन के साथ कैसा व्यवहार करता है और क्या उसके घर में महिलाओं को फैसले लेने का अधिकार है या नहीं।
-राजीव गुप्ता, समाजशास्त्री, जयपुर
आयशा आरिफ खान (2021): अहमदाबाद की इस बेटी ने कॉर्पोरेट पति की पैसों की लगातार मांग से तंग आकर साबरमती नदी में कूदकर जान दे दी थी।
विस्मया वी. नायर (2021): केरल की मेडिकल छात्रा, जिसे उसके सरकारी अधिकारी पति ने दहेज में मिली कार और सोने की शुद्धता को लेकर प्रताड़ित किया।
गीतिका शर्मा (2012): पूर्व एयरहोस्टेस, जिसने एक रसूखदार राजनेता और कॉर्पोरेट प्रोफाइल वाले मालिक के मानसिक उत्पीड़न से तंग आकर सुसाइड किया था।
अंजलि मखीजा (2010): मुंबई के बेहद धनी कारोबारी परिवार की बहू, जिसने अमरीका में प्रॉपर्टी ट्रांसफर करने और कम दहेज के तानों के कारण आत्महत्या कर ली।
निशा शर्मा (2003): सॉफ्टवेयर इंजीनियर निशा ने शादी के मंडप में ऐन वक्त पर कार और कैश मांगने वाले रसूखदार दूल्हे की बारात को वापस लौटाकर मिसाल पेश की थी।
1. क्या दहेज प्रथा आज भी संपन्न-शिक्षित परिवारों में किसी न किसी रूप में मौजूद है?
| जवाब | प्रतिशत |
|---|---|
| हां | 94% |
| नहीं | 4% |
| कुछ हद तक | 2% |
2. क्या आपने अपने आसपास लड़की पक्ष को उपहार, कार या खर्च को लेकर ताने देते सुना या देखा है?
| जवाब | प्रतिशत |
|---|---|
| हां | 68% |
| नहीं | 26% |
| कभी-कभी | 6% |
3. क्या बहू की कमाई को परिवार की आय मानना, लेकिन बराबर निर्णय का अधिकार न देना मानसिक प्रताड़ना है?
| जवाब | प्रतिशत |
|---|---|
| हां | 93% |
| नहीं | 7% |
4. शादी तय करते समय आपकी नजर में सबसे महत्वपूर्ण क्या होना चाहिए?
| विकल्प | प्रतिशत |
|---|---|
| परिवार की आर्थिक स्थिति | 12% |
| लड़के/लड़की का पैकेज | 4% |
| विचार और आपसी सम्मान | 80% |
| सामाजिक प्रतिष्ठा | 4% |
दहेज और पितृसत्ता का नया चेहरा अक्सर खुले तौर पर दिखाई नहीं देता, लेकिन व्यवहार और अपेक्षाओं में साफ झलकता है। यदि शादी से पहले या बाद में परिवार की ओर से लगातार 'स्टेटस' के हिसाब से खर्च की उम्मीद की जाए, महंगी कार, गिफ्ट और लग्जरी आइटम को 'प्यार' का नाम दिया जाए या 'लोग क्या कहेंगे?' कहकर दबाव बनाया जाए, तो यह चेतावनी का संकेत हो सकता है।
मिलनी और रस्मों में रकम की तुलना करना, शादी के बाद यह ताना देना कि 'उन्होंने अपनी बेटी को क्या दिया?', बहू की सैलरी को परिवार की आय मानना लेकिन उसे बराबर निर्णय का अधिकार न देना और लड़की वालों से हर मौके पर खर्च की उम्मीद रखना भी उसी सोच का हिस्सा है, जो आधुनिक दिखने के बावजूद बराबरी और सम्मान को स्वीकार नहीं करती।
Updated on:
31 May 2026 03:01 am
Published on:
31 May 2026 02:53 am
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