भोपाल

मंत्री-विधायक-सांसदों को घेराबंदी का डर, एमपी में गांव जाने से कतरा रहे बीजेपी नेता

MP BJP : दीपावली पर गांवों में जाने का फरमान... समस्याओं पर सवालों से डरे जनप्रतिनिधि, खाद-बिजली की किल्लत में किसानों के गुस्से का करना पड़ सकता है सामना
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Updated: 7 Nov 2026, 8:25 AM IST
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MP BJP : मध्यप्रदेश में बीजेपी नेता गांव जाने से कतरा रहे हैं। सत्ताधारी दल के कई मंत्री, सांसद और विधायकों की सांसें फूल रही हैं। आशंका है कि गांव पहुंचे तो कहीं खाद की किल्लत और बंद ट्रांसफार्मर की समस्या से जूझ रहे लोग उनकी घेराबंदी न कर लें। इस भय से शुक्रवार तक किसी भी मंत्री, सांसद और विधायक ने गांव जाने की कार्ययोजना जारी नहीं की। जबकि सत्ता व संगठन ने 4 दिन पहले ही अल्टीमेटम दिया था कि दीपावली से गोवर्धन पूजा के दौरान गांव जाएं, वहां के लोगों से संवाद करें। सरकार की योजनाओं का फीडबैक लें, यदि गांव के लोग किसी समस्या से जूझ रहे हैं तो उन्हें राहत दिलाएं। इन्हें ऐसे गांव चुनने थे, जहां नि:शुल्क रजिस्ट्री अभियान के तहत शत-प्रतिशत काम हो गया हो। हालांकि किसी ने गांव जाने से मना नहीं किया है। सूत्रों के अनुसार, प्रदेश के कुछ मंत्री-विधायक और सांसदों ने सत्ता व संगठन को कहा है कि गांवों में अप्रिय स्थिति बन सकती है।

कैबिनेट बैठक में कहा था गांव जाएं

पिछली कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री की और से कहा गया था कि दीपावली व गोवर्धन पूजा के मौके पर मंत्री व विधायक जाएंगे। अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि वे मंत्री, विधायकों से संपर्क करें, उनकी सुविधा के अनुसार गांवों को चिह्नित करें। खुद भी मौजूद रहे।

गांवों में नेताओं को घेराबंदी की आशंका की ये 3 बड़ी वजह

  1. रबी फसल के लिए खेत तैयार करने का काम जारी है। जिनके खेत तैयार हो चुके वे कम बारिश के चलते समय से पहले बुवाई करना चाहते हैं लेकिन खाद की किल्लत बनी हुई है, जो लोग इस कमी से जूझ रहे हैं कि उनमें से 6392 लोगों ने सीएम हेल्पलाइन समेत विभिन्न माध्यमों पर शिकायतें भी की है। आशंका है कि खाद की कमी से जूझ रहे ये लोग मंत्री-विधायकों की घेराबंदी कर सकते हैं।
  2. कई गांवों में खेती की लाइन के लिए लगाए ट्रांसफार्मर ही बंद है, तो कुछ लोड नहीं ले रहे। परेशान लोगों में से 2876 लोगों ने विभिन्न माध्यमों पर शिकायतें भी की हैं। किसानों के मुताबिक इन्हें कई महीने से बदले की मांग की जाती रही लेकिन मैदानी अमले ने नहीं सुना। पहले 100 फीसद बकाया भुगतान मांग रहे, तब ही ट्रांसफार्मर लगाएंगे। कई जगह राशि दे चुके, लेकिन ट्रांसफार्मर ठीक नहीं किया जा रहा।
  3. कहने को तो खेती के लिए 10 घंटे बिजली दी जा रही है लेकिन किसानों की मानें तो यह हकीकत नहीं है। आए दिन कटौती करते हैं, पूरी बिजली नहीं देते, फाल्ट की अवधि में जितने समय बिजली बंद की जाती है, उसकी भरपाई नहीं करते। किसानों को पंप चालू करने के लिए रात-रातभर खेत में बिजली का इंतजार करना पड़ता है। कई गांवों में इसको लेकर किसान संगठन प्रदर्शन तक हो कर चुके हैं।
Updated on:
7 Nov 2026, 8:25 AM IST
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