Sumer Singh Solanki- सुमेर सिंह सोलंकी ने राज्यसभा में आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए मांग रखी
Sumer Singh Solanki- आरक्षण की सुविधा पर धर्मांतरित लोग डाका डाल रहे हैं। इस पर सख्त कानून बनाने की मांग की गई है। एमपी के बीजेपी सांसद सुमेर सिंह सोलंकी ने सदन में इसके लिए आवाज उठाई। उन्होंने मांग की कि धर्मांतरण पर आरक्षण का लाभ नहीं मिले। भाजपा सांसद सुमेर सिंह सोलंकी ने राज्यसभा में आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए यह मांग रखी। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण किया तो आदिवासी का आरक्षण खत्म कर डी-लिस्टिंग हो, सरकार को ऐसा कानून लाना चाहिए।
मप्र से भाजपा सांसद सुमेरसिंह सोलंकी ने राज्यसभा में शुक्रवार को धर्मांतरण का मुद्दा उठाया। उन्होंने शून्य काल में यह मुद्दा उठाकर कहा कि देश में सबको धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार तो है, परंतु छल, बल और प्रलोभन द्वारा धर्मांतरण कानूनी अपराध है। धर्मांतरण रोकने के लिए संविधान में संशोधन होना चाहिए।
भाजपा के मध्यप्रदेश से सांसद सुमेर सिंह सोलंकी ने कहा कि इसके तहत आदिवासी समाज का जो व्यक्ति धर्मांतरित हो चुका है, उनका आरक्षण खत्म होना चाहिए। उन्हें डी-लिस्टिंग भी कर देना चाहिए। यह लोग जनजाति समाज के हक को मार रहे हैं।
राज्यसभा में सोलंकी ने कहा कि कई राज्यों में धर्मांतरण रोकने के लिए कानून बनाए गए हैं, फिर भी पूरे देश में एक कठोर कानून की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इससे आदिवासी के अधिकारों और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा की जा सकती है। 24 मार्च 2026 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एससी वर्ग के मामले में जो फैसला दिया गया है कि धर्म बदला तो आरक्षण खत्म, इस फैसले का स्वागत करता हूं। इस प्रकार की व्यवस्था या कानून जनजाति समाज के धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए भी होना चाहिए और उनकी घर
वापसी होना चाहिए।
सांसद सुमेर सिंह ने कहा कि आज धर्मांतरण हमारे देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन चुका है, जिस पर हमें सोचना पड़ेगा। आदिवासी समाज सनातन धर्म, संस्कृति और परंपराओं को मानने वाला रहा है, लेकिन धर्मांतरण के कारण आज जनजाति समाज की पहचान खतरे में है, जिसकी हम सबको चिंता करनी चाहिए। आज छल एवं डरा धमकाकर
धर्मांतरण किया जा रहा है। आर्थिक लालच देकर, नौकरी, इलाज और शिक्षा का लालच देकर, अंधविश्वास भ्रम फैलाकर धर्मांतरण किया जा रहा है। शादी विवाह के माध्यम से धर्मांतरण किया जा रहा है, सामूहिक धर्मांतरण किया जा रहा है जो संगठित अपराध की श्रेणी में आता है। यह खेल कई राज्यों में चल रहा है। इससे जनजाति संस्कृति, परंपराएं, रीति
रिवाज, पूजा पद्धति और मेरे आदिवासी की पहचान धीरे-धीरे खत्म करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। कई सामाजिक संगठनों ने और हमारे आदिवासी जनप्रतिनिधियों ने लगातार धर्मांतरण रोकने की मांग की है।