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तपती गर्मी में पक्षियों के लिए ‘कलचुरी सेना’ बनी सहारा, घर-घर बांटे 201 सकोरे

mp news: रामनवमी के पावन पर्व को सामाजिक सरोकार से जोड़ते हुए कलचुरी सेना संस्था ने शहर के वीआईपी और रिहायशी इलाकों में 'सकोरा वितरण अभियान' चलाया।

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mp news: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में पारा चढ़ने के साथ ही इंसानों के साथ-साथ मूक पक्षियों के लिए भी संकट खड़ा हो गया है। भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच बेजुबान पक्षी पानी की तलाश में न भटकें, इसी नेक उद्देश्य के साथ 'कलचुरी सेना परिवार' ने एक बड़ी मानवीय पहल की शुरुआत की है। रामनवमी के पावन पर्व को सामाजिक सरोकार से जोड़ते हुए संस्था ने शहर के वीआईपी और रिहायशी इलाकों में 'सकोरा वितरण अभियान' चलाया।

पक्षी संरक्षण के लिए जमीनी स्तर पर प्रयास

शुक्रवार को रामनवमी के अवसर पर कलचुरी सेना परिवार मध्य प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष कौशल राय के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं की एक विशेष टीम गठित की गई। इस टीम ने रविशंकर नगर, अरेरा कॉलोनी, श्याम नगर और चार इमली जैसे क्षेत्रों का भ्रमण किया। अभियान के तहत संस्था के सदस्यों ने न केवल सार्वजनिक स्थानों पर मिट्टी के पात्र (सकोरे) रखे, बल्कि घर-घर जाकर नागरिकों को 201 सकोरे भेंट किए।

नागरिकों से की 'छत पर जल' रखने की अपील

सकोरा वितरण के दौरान कार्यकर्ताओं ने स्थानीय रहवासियों से संवाद कर उन्हें पक्षी संरक्षण के प्रति जागरूक किया। कौशल राय ने नागरिकों से अपील की कि वे इन सकोरों को अपने घर की छतों, बालकनी, खिड़कियों या आंगन के पेड़ों पर सुरक्षित स्थान पर रखें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केवल पात्र रखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि तपती धूप में उनमें नियमित रूप से स्वच्छ और शीतल जल भरना भी आवश्यक है, ताकि उड़ते हुए पक्षियों को तत्काल राहत मिल सके।

बढ़ते शहरीकरण के बीच घटते प्राकृतिक स्रोत

अध्यक्ष कौशल राय ने कहा, रामराज की कल्पना ही सर्वहित और करुणा पर आधारित है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का जीवन हमें हर जीव के प्रति दया भाव रखने की प्रेरणा देता है। आज बढ़ते शहरीकरण और कंक्रीट के जंगलों के कारण पक्षियों के लिए पारंपरिक जल स्रोत जैसे तालाब और तलैया लगभग खत्म हो गए हैं। ऐसे में हम इंसानों का यह कर्तव्य है कि हम उनकी प्यास बुझाने का माध्यम बनें।

पर्यावरण संतुलन के लिए पक्षी जरूरी

संस्था के अन्य पदाधिकारियों ने पर्यावरण संतुलन में पक्षियों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पक्षी न केवल पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा हैं, बल्कि वे कीट-पतंगों को नियंत्रित कर प्रकृति को स्वच्छ रखने में भी मदद करते हैं। कलचुरी सेना की इस पहल का स्थानीय रहवासियों ने खुले दिल से स्वागत किया। कई प्रबुद्ध नागरिकों ने संकल्प लिया कि वे न केवल स्वयं अपनी छतों पर सकोरे रखेंगे, बल्कि अपने पड़ोसियों और रिश्तेदारों को भी इस मुहिम से जोड़ेगे। इस अभियान में कलचुरी सेना परिवार के दर्जनों सक्रिय कार्यकर्ता शामिल रहे, जिन्होंने भीषण धूप की परवाह न करते हुए इस सेवा कार्य को संपन्न किया। संस्था ने आगामी दिनों में शहर के अन्य इलाकों में भी इसी तरह के वितरण कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है।