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मध्यप्रदेश में पैथोलॉजी लैब्स को लेकर एक अहम मुद्दा अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। हाल ही में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने एक ऐसी बात कही, जो आम लोगों के मन में पहले से चल रही शंका को सामने लाती है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि यह धारणा बन चुकी है कि दिनभर लैब टेक्नीशियन सैंपल की जांच करते हैं और शाम को पैथोलॉजिस्ट केवल रिपोर्ट पर हस्ताक्षर कर देते हैं। अगर ऐसा हो रहा है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने इस मामले में सख्त रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि मरीजों को सही और भरोसेमंद मेडिकल रिपोर्ट मिलना उनका बुनियादी अधिकार है। अदालत के सामने जो रिकॉर्ड पेश किए गए, उनमें यह भी सामने आया कि एक ही पैथोलॉजिस्ट 26 अलग-अलग लैब्स में रिपोर्ट तैयार कर रहा है। ये लैब्स अलग-अलग जिलों में हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि एक व्यक्ति इतनी जगहों पर एक साथ काम कैसे कर सकता है? कोर्ट ने इस स्थिति को चिंताजनक बताया और सभी संबंधित पक्षों से सुधार के सुझाव मांगे हैं। अगली सुनवाई 12 मई को तय की गई है, जिसमें इस मुद्दे पर आगे चर्चा होगी।
इस मामले में कई संगठनों ने याचिकाएं दायर की हैं। इनमें महाकौशल एसोसिएशन ऑफ पैथोलॉजिस्ट, एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट मेडिकल प्रैक्टिशनर्स भोपाल, मेडिकल लैब टेक्नीशियन एसोसिएशन, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और एसोसिएशन ऑफ नर्सिंग होम्स जबलपुर शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि कुछ याचिकाएं सरकार के उस फैसले के समर्थन में हैं, जिसमें एक पैथोलॉजिस्ट को केवल दो लैब्स तक सीमित करने की बात कही गई थी, जबकि कुछ इस फैसले का विरोध कर रही हैं।
महाकौशल एसोसिएशन ऑफ पैथोलॉजिस्ट की ओर से कहा गया कि 22 अक्टूबर 2024 को जारी सरकारी आदेश के मुताबिक, केवल वही व्यक्ति लैब चला सकता है जिसके पास पैथोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री हो। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। कई जगहों पर बिना योग्यता वाले लोग लैब चला रहे हैं, जिससे मरीजों की जान खतरे में पड़ सकती है।वहीं सरकार ने अपनी तरफ से सफाई देते हुए कहा कि उसका मकसद पैथोलॉजिस्ट के अधिकार कम करना नहीं है, बल्कि मरीजों को सही और सटीक रिपोर्ट उपलब्ध कराना है।
Published on:
28 Mar 2026 05:42 am
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