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खजूरी कला में महादेव के शिवलिंग में झलकी मां महागौरी की छवि

bhopal news: आनंदेश्वर महादेव मंदिर में नवरात्रि महोत्सव के दौरान 'शिव और शक्ति' के अभेद संबंध का सजीव चित्रण देखने को मिला है।

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khajuri kala

shivling decorated as mahagauri navratri temple

bhopal news: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के खजूरी कला के आनंदम कॉलोनी से भक्ति और श्रद्धा की एक ऐसी अनूठी तस्वीर सामने आई है, जिसने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया है। यहां के आनंदेश्वर महादेव मंदिर में नवरात्रि महोत्सव के दौरान 'शिव और शक्ति' के अभेद संबंध का सजीव चित्रण देखने को मिल रहा है। मंदिर में भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग को माता रानी के विभिन्न स्वरूपों में सजाकर एक नई परंपरा की शुरुआत की गई है।

महाअष्टमी पर मां महागौरी का श्रृंगार

चैत्र नवरात्रि के आठवें दिन, यानी महाअष्टमी के अवसर पर आनंदेश्वर महादेव का श्रृंगार मां महागौरी के रूप में किया गया। श्वेत वस्त्रों, मोगरे और गेंदे के सुगंधित पुष्पों, भव्य मुकुट और विशेष आभूषणों के माध्यम से शिवलिंग को ऐसा स्वरूप दिया गया कि भक्तों को साक्षात् माता रानी के दर्शन महादेव में ही होने लगे। इस मनमोहक छवि को देखने के लिए सुबह से ही मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहा। पीतल के त्रिशूल और डमरू के साथ माता के इस ममतामयी स्वरूप के दर्शन कर हर कोई भाव-विभोर हो उठा।

मातृशक्ति की अनूठी पहल: स्वयं करती हैं श्रृंगार

इस विशेष आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पूरी तरह से स्थानीय महिलाओं की श्रद्धा और मेहनत का परिणाम है। आनंदम कॉलोनी की महिलाओं की एक टोली प्रतिदिन सुबह और शाम मंदिर में एकत्रित होती है। टोली की सदस्य महिलाओं ने बताया कि वे बारी-बारी से माता के नौ रूपों का अध्ययन करती हैं और फिर उसी के अनुरूप शिवलिंग का श्रृंगार करती हैं। कभी मां शैलपुत्री तो कभी माँ कात्यायनी, और अब महाअष्टमी पर माँ महागौरी के रूप में महादेव को सजाना उनके लिए आत्मिक संतोष का विषय है। महिलाओं का कहना है कि वे कई घंटों तक लगन के साथ पुष्पों और अलंकारों का चयन करती हैं ताकि श्रृंगार जीवंत लगे।

सामूहिक भक्ति और हवन से महका वातावरण

महाअष्टमी पर विशेष श्रृंगार के बाद मंदिर परिसर में विधिवत हवन-पूजन और महाआरती का आयोजन किया गया। आहुतियों की खुशबू और मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। कॉलोनी के रहवासियों के अनुसार, इस नवरात्रि महोत्सव ने पूरी आनंदम कॉलोनी को एक सूत्र में पिरो दिया है। प्रतिदिन शाम को सामूहिक भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है, जिसमें बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।

शिव-शक्ति की एकता का संदेश

मंदिर समिति और स्थानीय प्रबुद्ध जनों का कहना है कि शिवलिंग का देवी स्वरूप में श्रृंगार यह संदेश देता है कि शिव और शक्ति एक-दूसरे के पूरक हैं। बिना शक्ति के शिव 'शव' समान हैं और बिना शिव के शक्ति का प्राकट्य संभव नहीं। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना है, बल्कि नई पीढ़ी को भी सनातन संस्कृति की गहराई और कलात्मकता से अवगत करा रहा है। देर रात तक चले इस महोत्सव का समापन महाप्रसाद वितरण के साथ हुआ, जिसमें सैंकड़ों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।