भोपाल

तीन चुनावों में भाजपा ने 85 प्रतिशत शहरी सीटें अपने नाम की, कांग्रेस 10 प्रतिशत सीटों तक सिमटी

पिछले तीन विधानसभा चुनावों का आईना - भाजपा ने 85 प्रतिशत शहरी सीटें अपने नाम की, कांग्रेस 10 प्रतिशत सीटों तक सिमटी
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Oct 22, 2018
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तीन चुनावों में भाजपा ने 85 प्रतिशत शहरी सीटें अपने नाम की, कांग्रेस 10 प्रतिशत सीटों तक सिमटी

भोपाल. भाजपा ने शहरी पार्टी होने का मिथ तोड़ा है। बीते तीन चुनावों में भाजपा ने 85 प्रतिशत शहरी सीटें अपने नाम की हैं। कांग्रेस केवल 10 प्रतिशत सीटों तक सिमटी रही। उसकी जीती सीटों में 90 प्रतिशत भले ही ग्रामीण पृष्ठिभूमि की हों, लेकिन ग्रामीण की कुल सीटों में उसे महज 28 फीसदी ही मिलीं।

रिजर्व सीटें भी जीतीं

भाजपा ने तीनों चुनावों में अनुसूचित जाति की 76 और अनुसूचित जनजाति की 70त्न सीटें जीतीं। 2003 में शहरी व एससी-एसटी सीटों के भरोसे ही कांग्रेस से सत्ता छीनी थी। आदिवासी कांग्रेस का सबसे मजबूत वोट आधार रहा है, लेकिन 2003 में आदिवासियों की नाराजगी उसे भारी पड़ी।

इस चुनाव में कांग्रेस के खाते में आदिवासी की आरक्षित महज चार फीसदी सीटें आई थीं। जबकि, भाजपा ने 88 प्रतिशत सीटों पर जीत दर्ज की थी। कांग्रेस ने 2008 और 2013 में 30त्न सीटें वापस छीन लीं।

- भाजपा तीन चुनावों से शहरी क्षेत्र की 85 और ग्रामीण की 64 प्रतिशत सीटें जीतकर सत्ता में है।

- कांग्रेस तीन चुनावों में शहरी क्षेत्र की 10 और ग्रामीण की 28 प्रतिशत सीटें अपने नाम कर पाई।

2018 के चुनाव में कमलनाथ ने सरकार से मांगा दूसरे सवाल का जवाब - प्रदेश बीमारियों का नर्क क्यों?

इधर, मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 से पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने 40 दिन-40 सवाल के तहत रविवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से दूसरा सवाल पूछा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की एनएचपी व एनएफएचएस रिपोट्र्स का हवाला देकर स्वास्थ्य सेवाओं की दुर्दशा बताई है। उन्होंने पूछा है कि आखिर मध्यप्रदेश को बीमारियों का नर्क क्यों बना दिया गया?

कमलनाथ ने कहा कि प्रदेश के ग्रामीण अस्पताल में एक व्यक्ति के एक बार भर्ती होने पर औसत खर्च 25961 रुपए आता है, जो देश के बड़े राज्यों में सबसे अधिक है। यही खर्च बिहार में 15237, तमिलनाडु में 16042 और उत्तरप्रदेश में 15393 रुपए है। बिहार और उत्तरप्रदेश के बाद मध्यप्रदेश में कुल प्रजनन दर सर्वाधिक 3.1 है। वहीं, 89.6 फीसदी महिलाओं की गर्भावस्था के दौरान पूरी जांच नहीं होती।

ऐसे बताई स्थिति

5 साल में गंभीर संक्रामक बीमारियों से 39118 पीडि़त।
2 सालों में टाइफॉइड से 229532 लोग पीडि़त।
48.8 फीसदी यानी 48 लाख बच्चे कुपोषित। देश में सबसे ज्यादा।
68.9 फीसदी खून की कमी के शिकार। 15-49 साल की 52.4 फीसदी महिलाएं शामिल।
47 फीसदी शिशु मृत्यु दर यानी 90 हजार बच्चे हर साल पहला जन्मदिन भी नहीं मना पाते।

Updated on:
22 Oct 2018 10:48 am
Published on:
22 Oct 2018 10:48 am