
भोपाल. अब पासपोर्ट बनवाने के लिए आवेदक को रिफरेंस देने की जरूरत नहीं होगी। विदेश मंत्रालय ने नियमों को सरल करते हुए कुछ बदलाव किए हैं। अभी तक ऑनलाइन आवेदन के वक्त फॉर्म में अपने आस-पास रहने वाले दो स्थानीय व्यक्तियों के नाम, नंबर और एड्रेस के साथ लोकल रिफरेंस डिटेल लिखनी होती थी।
जिसका उपयोग पुलिस वेरिफिकेशन के वक्त किया जाता था लेकिन अब आवेदकों को ऑनलाइन आवेदन करते वक्त लोकल रिफरेंस डिटेल भरने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि आवेदक में ऐसी स्थिति में अपने आधार कार्ड की डिटेल्स देनी होगी।
कई बार हो जाती थी एडवर्स पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट
मप्र की रीजनल पासपोर्ट अधिकारी रश्मि बघेल ने बताया कि विभाग ने देखा कि कई बार आवेदक के पास संबंधित व्यक्तियों की जानकारी के बगैर उनका नाम, नंबर लोकल रिफरेंस डिटेल में दे देते थे लेकिन वेरिफिकेशन के वक्त वह रिफरेंस इससे इंकार कर देते थे। ऐसे में आवेदक को कई बार एडवर्स पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट का सामना करना पड़ता था।
विदेश मंत्रालय की ओर से किए गए इस बदलाव से आवेदकों को पासपोर्ट मिलने की प्रक्रिया और भी सरल हो गई है। कई बार लोकल रिफरेंस नहीं होने के चलते कई लोगों को पासपोर्ट बनवाने के लिए परेशान होना पड़ता था। इस समस्या की लोगों ने गई बार अधिकारियों को शिकायत भी की थी।
यह नियमों में भी हो चुका है बदलाव
- अनरिजस्टर्ड रेंट एग्रीमेंट और पोस्टपेड मोबाइल बिल भी एड्रेस प्रूफ के तौर पर मान्य
- पासपोर्ट बनवाने के लिए जन्म प्रमाणपत्र की बाध्यता खत्म
- 8 से कम और 60 साल से ज्यादा के आवेदकों की फीस में 10 फीसदी की छूट
- आवेदक अब सिर्फ एक अभिभावक या लीगल गार्जियन का नाम ही दे सकते हैं
- एनेग्जर्स की संख्या १५ से घटाकर 9 कर दी गई है।
- विवाह प्रमाणपत्र या तलाक की डिक्री देना अनिवार्य नहीं होगा
- सरकारी वरिष्ठ कर्मचारी को एनओसी देने की जरूरत नहीं