थ्री-एम कंपनी के मानकों के अनुसार गढ़ी है स्मार्ट सिटी प्रबंधन ने रोड साइन बोर्ड की शर्तें
भोपाल. स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कारपोरेशन प्रबंधन ने नगरीय निकाय सीमा में रोड सेफ्टी साइन बोर्ड के लिए निकाले गए ५० करोड़ के टेंडर में ३एम इंडिया कंपनी के मुताबिक शर्तें गढ़ी गई। टेंडर में ७ अहम शर्तें एेसी हैं जो ३एम इंडिया कंपनी ही पूरी करती है और कुछ एेसी हैं जो अन्य बिडर-कंपनियों को बाहर करने के लिए जोड़ी गई है।
यहीं नहीं, टेंडर में लोक निर्माण विभाग के एसओआर से करीब तीन गुना अधिक दरों पर काम करने का जिक्र किया गया है। टेंडर में इन शर्तों को जोडऩे से तत्कालीन प्रमुख सचिव प्रमोद अग्रवाल ने इंकार कर किया तो उन्हें हटा दिया गया। लेकिन बाद में यही शर्तें जोडक़र टेंडर जारी किया गया है।
गौरतलब है कि इंदौर स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कारपोरेशन के लिए भी ५० करोड़ का टेंडर निकाला गया है, जिसकी तमाम शर्तें हुबहू, भोपाल स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कारपोरेशन के समतुल्य है। जबकि दोनों शहरों की भौगोलिक सीमाएं, टोपोग्राफी, मार्ग की लंबाई-चौड़ाई और शहर-नगर निगम का क्षेत्रफल अलग-अलग हैं। दोनों शहर में १०० करोड़ रुपए की लागत के इस टेंडर में बड़ी धांधली सामने आ रही है।
सरकार और नगर निगम के अफसरों पर दबाव राज्य की कांग्रेस सरकार द्वारा नगर निगम की भाजपा नगर सरकार में पदस्थ अफसरों पर इस टेंडर को लेकर जमकर दबाव बनाया जा रहा है। अभी यह टेंडर किसी को भी अवॉर्ड नहीं हुआ है, लेकिन इसकी शर्तें एेसी हैं कि अन्य कंपनियां-बिडर इसमें शामिल ही नहीं हो पाएंगी। इसके चलते विवाद गहराता जा रहा है। टेंडर के बारे में स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कारपोरेशन के सीईओ संजय कुमार का कहना है कि सभी काम नियमानुसार होगा। टेंडर में प्री-बिड बुलाई गई है, जिसमें आने वाली आपत्तियों पर विचार किया जाएगा।
ये हैं टेंडर की एक तरफा शर्तें
- साइनेज की डिजिटल प्रिंटिंग के लिए एचपी लेटेक्स प्रिंटर-३६५ की शर्त जोड़ी गई। यह प्रिंटर देशभर में सिर्फ ३एम इंडियां कंपनी के पास ही है। यदि अन्य कंपनी यह प्रिंटर खरीदना चाहती है तो एचपी कंपनी को भी बेचने से पहले ३एम कंपनी से अनुमति लेना पड़ेगी।
- एचपी लेटेक्स प्रिंटर-३६५ से छपने वाली सामग्री की अधिकतम लाइफ पांच साल है, जबकि इंडियन रोड कांग्रेस के मानकों का हवाला देकर १० साल तक की लाइफ वाले आइटम मांगे गए हैं।
- न्यूनतम फाइनेंशियल क्राइटेरिया की अनदेखी की गइ। इतने बड़े काम के लिए फाइनेंशियल टर्नओवर और स्टेटस व नेटवर्थ के साथ ही बैंक क्रेडिट में छूट दे दी गई।
पत्रिका ने उठाया मुद्दा
पत्रिका ने ३ मार्च के अंक में निगम से हो रहे कामों को भी स्मार्ट सिटी फिर करवाएगी, शीर्षक से प्रकाशित किया था। इसके बाद ५ मार्च के अंक में स्मार्ट सिटी के साइन बोर्ड का टेंडर घिरा विवादों में, अब केंद्र सरकार तक पहुंची शिकायत शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर इस धांधली को उजागर किया है।