भोपाल

रहें अलर्ट…30 घंटे से सुलग रही आग, हवा में घुली ‘माइक्रो प्लास्टिक’

MP News: कण आग बुझाते समय अधजली प्लास्टिक के धुएं के साथ उड़े और हवा में फैल गए। इसके कण सांस के जरिए फेफड़ों में जमा हो रहे हैं।
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Apr 25, 2025
Burning In Adampur
Burning In Adampur

MP News: एमपी में भोपाल की सबसे बड़ी आदमपुर कचरा खंती में उठे धुंए से हवा में माइक्रो प्लास्टिक के कण घुल गए हैं। ये कण आग बुझाते समय अधजली प्लास्टिक के धुएं के साथ उड़े और हवा में फैल गए। इसके कण सांस के जरिए फेफड़ों में जमा हो रहे हैं। फल, सब्जियों और अन्य खाद्य पदार्थों में भी इनकी मौजूदगी देखी गयी है। बड़ा तालाब समेत अन्य जल स्रोतों में इनके घुलने से ये जलीय जीवों और मछलियों के आहार के जरिए उनके पेट में पहुंच रहे हैं। पर्यावरणविदों के अनुसार यह बहुत ही खतरनाक स्थिति है।

हर व्यक्ति सालाना पैदा करता है 36 किग्रा प्लास्टिक कचरा

भोपाल में प्रति व्यक्ति सालाना औसतन 36 किलोग्राम प्लास्टिक पैकेजिंग का कचरा पैदा करता है। इसका महज 30 फीसद ही रीसाइक्लिंग या पुनचक्रण हो पाता है। बाकी कचरे के रूप में लैंड फिल में जमा होता है। लैंडफिल, भस्मीकरण संयंत्रों के जरिए यह हवा, पानी और मिट्टी में मिलता है। माइक्रोप्लास्टिक्स में बिस्फेनॉल ए (बीपीए) और फ़ेथलेट्स जैसे हानिकारक रसायन होते हैं, जो कैंसर के कारण बन सकते हैं।

सेहत के लिए गंभीर खतरा

माइक्रो प्लास्टिक के कण त्वचा रोग, अनियंत्रित वजन, इंसुलिन प्रतिरोध, प्रजनन स्वास्थ्य में कमी और कैंसर जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा करते हैं। माइक्रो प्लास्टिक ह्यूमन बॉडी के कई अहम हिस्सों में जमा होने से दिमाग पर असर डालता है। ये रेड ब्लड सेल्स के बहरी हिस्से से चिपक जाते हैं और ऑक्सीजन फ्लो को पूरी तरह तोड़ सकते हैं, जिससे शरीर के टिश्यू में ऑक्सीजन में कमी आ सकती है।

धधक रही आग

आदमपुर खंती के कचरे में लगी आग तीसरे दिन भी धधक रही है। इसका धुआं पांच किलोमीटर दूर से दिखाई दे रहा है। आग से आसपास के 20 किलोमीटर के दायरे का पर्यावरण प्रभावित हुआ है। करीब नौ गांवों के लोग धुंए से परेशान है। अभी खंती में लगभग 10 लाख टन कचरा जमा है। यही सुलग रहा है।

धुएं और दुर्गंध का असर पड़रिया, बिलखिरिया, शांति नगर, समरधा, अर्जुन नगर, हरिपुरा, छावनी, कोलुआ और आदमपुर छावनी गांवों में है। करीब 20 हजार की आबादी इससे बहुत परेशान है।

आग लगी नहीं, लगायी गयी

स्थानीय निवासियों को आरोप है कि निगम और कचरा प्रोसेसिंग कंपनी ने ये आग लगाई है, ताकि कचरा प्रोसेसिंग की प्रक्रिया से बचा जा सके। बहरहाल, अभी निगम 1.80 करोड़ रुपए के जुर्माने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा लड़ रहा है।

Updated on:
25 Apr 2025 05:19 pm
Published on:
25 Apr 2025 05:19 pm