भोपाल

ALERT: ड्राइविंग सीट पर बैठने वालों के लिए आ गई सबसे बड़ी मुसीबत

mp.patrika.com आपको बताने जा रहा है कि चप्लल पहनकर कभी भी वाहन न चलाएं और यातायात के इन नियमों का पालन करें...।

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Feb 17, 2018

भोपाल। क्या आप जानते हैं कि चप्पल और सैंडिल पहनकर वाहन चलाना आपको महंगा पड़ सकता है। जी हां, मध्यप्रदेश के विदिशा में शुक्रवार को एक वाहन चालक का पैर ब्रिक पर से फिसलकर ब्रेक और एक्सीलेटर के बीच में फंस गया। वह वाहन का कंट्रोल नहीं कर पाया और वाहन ने तेज रफ्तार पकड़ ली। वह वाहन कार से बुरी तरह से टकरा गया और वाहन चालक की मौके पर ही मौत हो गई।

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सबसे बड़ी बात
-कभी भी चप्पल और सेंडिल पहनकर वाहन नहीं चलाना चाहिए। क्योंकि आपकी चप्पल या सेंडिल फिसलकर ब्रेक और एक्सीलेटर के बीच फंस जाता है और ब्रेक लगने की बजाय एक्सीलेटर से वाहन की स्पीड और बढ़ जाती है। इसके बाद हादसा होना तय है।

मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करें
भाग दौड़ भरी जिन्‍दगी में सेल फोन हमारी जिन्‍दगी का अहम हिस्‍सा बन गया है। लेकिन वाहन चलाते समय तो बिल्कुल भी नहीं इसका इस्तेमाल करना चाहिए।कई लोग तो चलते वाहन में वाट्सअप तक का इस्तेमाल करने लगते हैं, जो गलत है। यदि इतना ही जरूरी हो तो वाहन सड़क किनारे पार्क करने के बाद इसका इस्तेमाल करना चाहिए।

महिलाओं के लिए भी है ये जरूरी बात
कई बार मिलाएं वाहन चलाते समय मेकउप करने लगती हैं या बाल संवारने लगती हैं, या कपड़े ठीक करने लगती हैं या फिर म्यूजिक आपरेट करने लगती है, तो महिलाओं को इन चीजों से बचना चाहिए। ऐसी स्थिति में कोई बड़ी दुर्घटना हो जाती है।


हेडफोन से म्यूजिक नहीं सुनें
अक्सर वाहन चलाने वाले लोग हेडफोन पर म्यूजिक सुनना पसंद करते हैं, ऐसे में आसपास से हार्न बजाने वाले वाहनों की आवाज वे नहीं सुन पाते हैं और दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।


कंट्रोल में रहे स्पीड
वाहन चलाते समय भी गति पर हमेशा नियंत्रण रहना चाहिए। वाहन उतना ही तेज चलाएं, जितना आप कंट्रोल कर सके। हमेशा एक ही स्पीड में वाहन चलाएं, और एक ही लेन में वाहन चलाना चाहिए। कभी भी अचानक दायें या बाएं वाहन को नहीं मोड़ना चाहिए।


बच्चों को भी बांधें सीट बेल्ट
यदि बच्चे कार में बैठे हैं तो उन्हें सीट बेल्ट बांधकर बैठाना चाहिए, क्योंकि अचानक दुर्घटना होने के समय आप खुद को तो बचाते हैं हीं बच्चों को नहीं बचा पाते हैं। इस दौरान वे अपने शरीर को भी खिड़की से बाहर निकाल देते है। बच्‍चो की इन उटपटांग हरकतों की वजह से आपका ध्‍यान सड़क से हट सकता है। सभी सुरक्षा का ध्यान रखने पर आप सुकून महसूस करेंगे।


वाहन में लिखना-पढ़ना टालें
ज्यादातर लोगों को देखा जाता है कि वे सुबह आफिस से जाते समय रास्ते में या छात्रों को स्कूल-कालेज छोड़ने के वक्त ड्राइविंग सीट पर ही लिखने पढ़ने लगते हैं। जो सभी के लिए खतरनाक साबित होता है। कार के डैश पर किताबो, मैग्जिनों, अखबारों को रखने से बचना चाहिए।


चलते वाहन में खाना-पीना नहीं
वाहन चलाते समय खाना-पीना नहीं चाहिए। इससे ध्यान बंटता है। यदि आपको भूख लगी है तो यात्रा खत्‍म होने का इंतजार करें या सड़क किनारे वाहन खड़ा कर खान-पान निपटा लें। अक्सर कई लोग वाहन चलाते समय कोल्ड्रिंग या पानी पीते हैं जो उनके ऊपर गिर जाता है। ऐसी स्थिति में चालक का ध्यान लड़क से भटक जाता है जो हादसे की वजह बन जाता है।


कार में शराब-सिगरेट से रहें दूर
कार चलाते समय दोस्तों के साथ कई लोग सिगरेट पीते हैं या शराब पीते हैं। इस बीच दोस्तों की मस्ती बढ़ती है या किसी से काम्पीटिशन करने लगते हैं, जो दुर्घटना का कारण बन जाता है।


ट्रैफिक सिग्नल में इन तीन रंगों का मतलब

लाल रंग
सिग्‍नल में लाल रंग का अपना एक खास महत्‍व है। लाल रंग की गति अन्‍य रंगों के मुकाबले सबसे तेज होती है। इस रंग को कितनी भी दूर से हम आसानी से देख सकते हैं। इसके अलावा सिग्‍नल में लाल रंग का प्रयोग न केवल आपको रोकने के लिए किया जाता है बल्कि यह इस बात का भी संकेत देता है कि आपके आगे खतरा है।


पीला रंग
यह रंग आपको निर्देशित करता है आप अपनी उर्जा को समेट कर तैयार हो जाएं। ट्रैफिक सिग्‍नल पर जब पीले रंग की लाईट जलती है तो उसका मतलब यही होता है कि आप अपने वाहन के इंजन को स्‍टार्ट रखें और आप धीमे -धीमे आगे बढ़ सकते हैं। पीले रंग में आपको रुकना नहीं होता है, लेकिन आप धीरे धीरे आगे बढ़ सकते हैं।


हरा रंग
यह रंग खतरे के बिलकुल विपरीत होता है। जैसा कि लाल रंग का प्रयोग वाहनों को रोकने के लिए किया जाता है उसी प्रकार हरे रंग का प्रयोग वाहनों को आगे बढ़ने के लिए किया जाता है। हरे रंग का मतलब है कि रास्ता आपके लिए खाली है और आप आगे बढ़ सकते हैं।


एक नज़र

– भारत में हर साल 1,20,000 लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं और 12,70,000 लोग गंभीर रूप से घायल होते हैं.
– अगर आंकड़ों की बात करें, तो भारत में हर छह मिनट में एक मौत सड़क दुर्घटना में होती है और वर्ष 2020 तक यह आंकड़ा हो जाएगा- हर 3 मिनट में एक मौत.
– पूरे विश्‍व के मुक़ाबले अकेले भारत में 10% मौतें सड़क दुर्घटनाओं में होती हैं.
– सुरक्षा नियमों का पालन बच्चों को सिखाना बहुत ज़रूरी है और यह तभी संभव है, जब पैरेंट्स और टीचर्स ख़ुद इन नियमों का पालन करें.
– चलते व़क्त हमेशा फुटपाथ का उपयोग करें. जहां फुटपाथ न हों, वहां सड़क के एकदम बाईं ओर ही चलें.
– कभी भी धैर्य खोकर जल्दबाज़ी न दिखाएं. सिग्नल तोड़कर या सामने से गाड़ी को आता देख भागकर रोड क्रॉस कभी न करें.

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Published on:
17 Feb 2018 11:33 am
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