29 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

इस अधूरे मंदिर में पूरी होती है मनोकामना, दुनिया में सबसे बड़ा है शिवलिंग

mp.patrika.com महाशिवरात्रि के मौके पर आपको बताने जा रहा है शिवालयों के बारे में, जो अपने आप में विशेष हैं और जहां भक्तों की मुराद पूरी होती है...।

4 min read
Google source verification

भोपाल

image

Manish Geete

Feb 04, 2018

shivratri 2018

भोपाल। देवों के देव महादेव के दुनियाभर में हजारों ऐतिहासिक मंदिर हैं। हर एक के पीछे रोचक कहानी है। इन्हीं में से एक है मध्यप्रदेश का भोजपुर मंदिर। दुनिया के सबसे विशाल शिवलिंग और इसके मंदिर निर्माण की कहानी भी दिलचस्प है। यह मंदिर मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से 28.1 किमी दूर स्थित भोजपुर में बेतवा नदी के किनारे है।

इसे भोजेश्वर मंदिर या मध्य भारत का सोमनाथ मंदिर भी कहा जाता है। लोगों का मानना है कि जो सोमनाथ दर्शन करने नहीं जा पाते, वे भोजेश्वर मंदिर में दर्शन करके उतना ही पुण्य प्राप्त कर सकते हैं। कुछ लोग इसे राजाभोज के कार्यकाल का बताते हैं वहीं कुछ लोग मानते हैं कि वनवास के दौरान इस शिव मंदिर को पांडवों ने बनवाया था और भीम इसी मंदिर पर घुटनों के बल बैठकर शिवलिंग पर फूल चढ़ाया करते थे।

mp.patrika.com महाशिवरात्रि के मौके पर आपको बताने जा रहा है मध्यप्रदेश के शिवालयों के बारे में, अपने आप में विशेष हैं और रहस्यमय हैं।

राजा भोज ने पिता की स्मृति में बनवाया था मंदिर
माना जाता है कि इस मंदिर को राजा भोज ने एक हजार साल पहले 1010 से 1055 के बीच बनवाया था। यह मंदिर उन्होंने अपने पिता की याद में बनवाया था। भोजपुर के शिवधाम से जुड़ी एक कहानी भी काफी प्रचलित है। वह यह है कि पांडवों की मां कुंती ने बेतवा नदी में कर्ण को छोड़ा था। यहां के स्थानीय लोगों की माने तो मंदिर का निर्माण पांडवों के हाथों से हुआ था।


अधूरे मंदिर में भी पूरी हो जाती है मनोकामनाएं
दुनियाभर में शिवालय हैं, लेकिन भोजपुर का मंदिर अपने आप में अनोखा है। यह मंदिर भोजपुर की छोटी से पहाड़ी पर है जो अधूरा शिवमंदिर है। लोगों की आस्था है कि यहां हमारी मनोकामना पूरी होती है। इसलिए श्रावण के प्रत्येक सोमवार को यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है, वहीं महाशिवरात्रि पर बड़ा मेला लगता है, जिसमें एक लाख से अधिक लोग दर्शन करने पहुंचते हैं।

यह है इस मंदिर की खासियत

एक पत्थर से बना है अनोखा शिवलिंग
इस मंदिर का निर्माण परमारवंश के राजा भोज ने बनवाया था। इस मंदिर की खासियत यह है कि इसका शिवलिंग काफी विशाल है जो विश्व का एक मात्र ऐसा शिवलिंग है जो एक ही पत्थर से बना हुआ है। इसकी लम्बाई 18 फीट (साढ़े पाच मीटर), व्यास साढ़े सात फीट (2.3 मीटर) है। जबकि शिवलिंग की लंबाई 12 फीट (3.85 मीटर) है।

70 टन वजनी पत्थरों के लिए बनाना पड़ा था रास्ता
यह भी खास बात है कि मंदिर के पिछले हिस्से में एक ढलान है, जिसकी मदद से विशाल पत्थरों को ढोकर मंदिर तक लाया गया था। प्राचीन काल में यही तकनीक अपनाई जाती थी। इतिहासकार भी इसके प्रमाण के बारे में बताते हैं।

इसलिए अधूरा रह गया भोजेश्वर मंदिर
इस मंदिर की तीसरी खासियत यह है कि इसका निर्माण अधूरा रह गया था। यह अधूरा क्यों रह गया इसके पीछे इतिहास में कोई प्रमाण नहीं मिलते हैं, लेकिन ऐसी मान्यता है कि यह मंदिर एक ही रात में बनाया गया था, लेकिन छत का काम पूरा होने से पहले ही सूर्योदय हो गया इसलिए काम छोड़ दिया गया था।


सबसे बड़ा है इसका दरवाजा
चौथी खासियत यह मानी जाती है कि इस मंदिर का दरवाजा किसी भी हिन्दू इमारत के दरवाजों में सबसे बड़ा है। इस मंदिर के गर्भ गृह के ऊपर जो गुम्बद आकार की छत है वह भी भारत में ही निर्माण के प्रचन को प्रमाणित करती है। कुछ विद्वान मानते हैं कि यह भारत में सबसे पहली गुम्बद आकार की छत है।

चार स्तम्भों पर टिका है मंदिर
इस मंदिर की पांचवी खासियत यह है कि मात्र चार स्तम्भों पर गुम्बज टिका हुआ है। यह जमीन से करीब 40 फीट ऊंचा है। इन्हीं गुम्बजों पर अधूरी छत टिकी हुई है। मंदिर के ठीक सामने पार्वती गुफा नामक गुफा है। यहां पुरामहत्व की अनेक मूर्तियां रखी हुई है। मंदिर के पास ही चट्टानों पर नक्शे बने हुए हैं। उससे पता चलता है कि मंदिर पर मंडल, महामंडल और अंतराल बनाने की योजना थी जो नहीं बन पाई।


यह मंदिर भी है अधूरा
मंदिर के पीछे महज आधा किलोमीटर दूर एक जैन मंदिर है वह भी अधूरा ही है। इस मंदिर में भगवान शांतिनाथ की मूर्ति है। जो जमीन से 6 मीटर ऊंची है। इनके अलावा दो अन्य मूर्तियां भी हैं जो पार्श्वनाथजी व पुपारासनाथजी की हैं। इस मंदिर के शिलालेख पर भी राजाभोज का नाम लिखा है। इसी मंदिर परिसर में आचार्य माटूंगा का समाधिस्थल भी है। इस पर लिखा है भक्तामर स्रोत्र।

ये भी पढ़ें

image
Story Loader