
Land rates प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- freepik)
MP News:एमपी के भोपाल शहर में 22 प्रोजेक्ट्स ने 122 क्षेत्रों की जमीन की कीमतों को बढ़ा दिया है। इसे इंक्रीमेंटल फैक्टर कहा जाता है। जमीन की कीमत बढ़ाने वाले फैक्टर होते हैं। इससे ही जमीन के आसपास विकास शुल्क तय होता है। कलेक्टर गाइडलाइन तय करने में इसकी बड़ी भूमिका है।
पंजीयन की तैयार की जा रही रिपोर्ट में ये इंक्रीमेंटल फैक्टर वाले क्षेत्र सामने आए हैं। इसी आधार पर आगामी समय में स्थानीय निकास विकास शुल्क तय करेगा। कॉलोनी हैंडओवर या फिर कॉलोनी में किसी तरह का काम करते समय इंक्रीमेंटल फैक्टर के आधार पर ही गणना होती है कि कितनी राशि जमा कराना है।
-16 किमी लंबाई के अयोध्या बायपास से करोद के बाद गांधी नगर की ओर के क्षेत्र।
-31 किमी लंबाई के पश्चिमी बायपास से रतनपुर से लेकर समसबढ़ और आगे फंदा जोड़ तक।
-30 किमी लंबाई की चार लेन सीसी रोड नीलबड़ से सीहोर जिले की सीमा तक
-03 किमी लंबे बैरागढ़ एलिवेटेड कॉरिडोर से सीहोर नाका और आगे तक की कीमतें।
अब देखने में आ रहा है कि शहर के पूर्व व पश्चिम की ओर नए प्रोजेक्ट्स आए हैं। खासकर करोंद व इससे आगे। बायपास चौड़ीकरण के साथ चार बड़े ब्रिज और विदिशा की ओर नेशनल हाइवे का काम अब वहां इंक्रीमेंटल फैक्टर बनकर उभरा है।- वीके चतुर्वेदी, रिटायर्ड अपर कलेक्टर
पंजीयन में हमेशा नए प्रोजेक्ट्स, उनसे बढ़ती जमीन की कीमत का आंकलन होता है। हमारा काम जारी है। नए क्षेत्रों पर फोकस है। - स्वप्रेश शर्मा, जिला पंजीयक
बताया जा रहा है कि कलेक्टर गाइडलाइन को लेकर तैयारियां चल रही हैं, कुछ ही दिन में प्रस्ताव तैयार होगा, जिसे उप जिला मूल्यांकन समिति की बैठक में रखा जाएगा। जिन क्षेत्रों में तय दाम से अधिक दाम पर रजिस्ट्रियां हुई हैं, वहां पर 15 से 20 फीसदी तक प्रापर्टी रेट में बढ़ोतरी होने की संभावना है। इसके लिए राजस्व विभाग से जानकारी मांगी गई है।
Updated on:
29 Jan 2026 12:37 pm
Published on:
29 Jan 2026 12:37 pm
