भोपाल

पाबंदी के बाद भी बाजार में पहुंची ‘कर्बाइड गन’, खतरनाक हो सकता इस्तेमाल, भोपाल में एडवाइजरी जारी

Carbide gun: दिवाली नजदीक आते ही प्रतिबंधित कार्बाइड गन की चोरी-छिपे बिक्री शुरू, ऑनलाइन होम डिलीवरी का भी दावा। एम्स ने इनसे दूर रहने की सलाह दी, पिछले साल एक बच्चे की आंख चली गई थी।
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Updated: 26 Oct 2026, 7:31 AM IST
कर्बाइड गन (Photo Source - Patrika)
कर्बाइड गन (Photo Source - Patrika)

Bhopal news: दिवाली नजदीक आते ही एक बार फिर चोरी छिपे प्रतिबंधित कार्बाइड गन की बिक्री शुरू हो गई है। पिछले साल हुई घटनाओं के बावजूद लोग इसे खरीदने से बाज नहीं आ रहे हैं। कार्बाइड गन की ऑनलाइन बिक्री भी हो रही है जिसकी होम डिलीवरी का दावा किया जा रहा है। उल्लेखनीय की कार्बाइड गन में कैल्शियम और दूसरे रसायन का इस्तेमाल कर विस्फोट पैदा किया जाता है, जो बच्चों को आकर्षित करता है। इसके अलावा आग लगाकर आसमान में छोड़ने वाला बैलून भी पिछले साल कई स्थानों पर अग्नि हादसों की वजह बना था, जिसके बाद इसे भी प्रतिबंधित कर दिया गया था। पटाखा कारोबारियों के मुताबिक सार्वजनिक स्थानों पर लगने वाली दुकानों पर यह सामग्री नहीं मिल रही है, लेकिन तथाकथित रूप से कुछ लोग अभी भी इसकी बिक्री कर रहे हैं।

एम्स की सलाह- ऐसे पटाखों से बचें

एम्स ने दिवाली पर कार्बाइड गन और देसी विस्फोटक उपकरणों से दूर रहने की सलाह दी है। इनके विस्फोट से आंख, चेहरा, हाथ और कान में गंभीर चोट लग सकती है। यदि किसी भी प्रकार की दुर्घटना होती है तो बगैर देर किए आंख के डॉक्टर को दिखाना ही बेहतर होगा। जलने और स्थायी शारीरिक अक्षमता का खतरा भी रहता है। एम्स ने अभिभावकों से बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखने की अपील की है।

शमशाबाद में चली गई थी बच्चे के आंख की रोशनी

बीते साल हुई घटना में शमशाबाद में रहने वाले बच्चे की आंख चली गई थी। शमशाबाद के धोबीखेड़ा गांव के ऋतिक अहिरवार की दूसरी आंख से भी उन्हें कम दिखाई देता है। पिता जसवंत सिंह के मुताबिक, दिवाली पर एक बच्चा बारूद वाली कार्बाइड गन चला रहा था। इसी दौरान गन की दिशा ऋतिक की आंख की तरफ हो गई और विस्फोट से उन्हें गंभीर चोट आई। परिवार ऋतिक को इलाज के लिए भोपाल के एम्स, आनंदपुर और चित्रकूट ले गया। अब डॉक्टरों ने चेन्नई में इलाज कराने की सलाह दी है।

क्या होती है कार्बाइड गन

कार्बाइड गन एक देसी या कम लागत से बना उपकरण है जिसका उपयोग मूल रूप से खेतों में फसलों को बंदरों और अन्य जानवरों से बचाने के लिए किया जाता था, लेकिन हाल के दिनों में इसे त्योहारों पर पटाखों के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा है। इसे बनाने के लिए प्लास्टिक या धातु के पाइप (जैसे PVC पाइप), गैस लाइटर और कैल्शियम कार्बाइड का उपयोग किया जाता है। पाइप के अंदर कैल्शियम कार्बाइड में पानी मिलाया जाता है। इन दोनों की प्रतिक्रिया से एसिटिलीन गैस बनती है, जो अत्यधिक ज्वलनशील होती है। जब लाइटर या चिंगारी से इस गैस को आग दी जाती है, तो एक तेज धमाका होता है और बंदूक की तरह तेज आवाज व चिंगारी निकलती है।

Updated on:
26 Oct 2026, 7:31 AM IST
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